यह सौभाग्य केवल रंगकर्मी को मिलता है कि वह एक जिंदगी में कई जिंदगियां जी लेता है। अलग अलग नाटकों में आपको अलग अलग भूमिकाएं मिलेंगी। कभी आप राजनेता तो कभी आप संन्यासी बनते हो। कभी आप पुलिस अधिकारी तो कभी आप अपराधी बनते हो। आप हर रोल के समय एक विषेष अनुभूति से गुजरते हो। किरदार को फील करके ही किरदार को जिया जा सकता है। ये बातें शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा प्राचार्य डाॅ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्षन में संचालित की जा रही अल्पावधि रोजगारोन्मुखी रंगकर्म प्रषिक्षण कार्यषाला में रंगकर्मी डाॅ. प्रवीण मालवीया ने कहीं। उन्होंने प्रषिक्षुओं को पर्यावरणीय चेतना पर आधारित एक लघु नाटक तैयार करते हुए नाट्यकला की बारीकियों से अवगत करवाया। डाॅ. मालवीया ने कहा कि संवाद और तनभाषा के सही समन्वय से नाटक में प्रभाव उत्पन्न होता है। संगीत तथा प्रकाष इसे और आकर्षक बनाते हैं। आप अपने दृष्यों में  और संवादों के इम्पेक्ट के रूप में संगीत का भी उपयोग कीजिये। कोरियोग्राफर ज्योति जोषी ने भी प्रषिक्षण देते हुए कहा कि संवादों पर रिएक्ट कीजिये। एक पात्र संवाद बोलते वक्त सिर्फ खड़े रहकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करेगा तो नाटक निर्जीव हो जायेगा। राहुल मालवीया और डाॅ. मधुसूदन चैबे ने भी टिप्स दीं। कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया ने बताया कि चालीस युवा इन दिनों काॅलेज में रंगकर्म का प्रषिक्षण ले रहे हैं। उन्हें उद्यान, स्टेडियम, स्टेज तथा खुले स्पेष में प्रषिक्षण देकर हर परिवेष में प्रस्तुति में सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

आयोजन में सहयोग रवीना मालवीया, सूरज सुल्या, जितेंद्र चैहान का रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *