बड़वानी /जिले में 5 स्थानों पर शासकीय गौशालाओं का निर्माण करवाया जा रहा है। इन गौशालाओं में अनिवार्य रूप से बोरिंग का खनन पशु चिकित्सा विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि से करवाया जायेगा। जिससे पशुओं को पीने एवं गौशाला की व्यवस्था हेतु लगने वाले पानी हेतु अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। कलेक्टर श्री  तोमर ने सोमवार को आयोजित समय सीमा बैठक में निर्माणाधीन गौशालाओं की समीक्षा करते हुए उक्त निर्देश जिला पंचायत के अतिरिक्त सीईओं श्री शैलेन्द्र शर्मा एवं उप संचालक पशु चिकित्सा डाॅ. एलएस बघेल को दिये। बैठक के दौरान कलेक्टर ने बताया कि गौशालाओं में ट्यूबवेल खनन हेतु पशु चिकित्सा विभाग ने स्वीकृति एवं 1 लाख रुपये प्रति गौशाला के मान से आवंटन उपलब्ध कराया है।

      बैठक के दौरान कलेक्टर ने गौशालाओं के निर्माण में संलग्न ऐजेंसियों को निर्देशित किया कि गौशालाऐं आत्मनिर्भर बने, इसके लिए गौशालाओं के पास चरागाह विकास के कार्यक्रम भी किये जा रहे है। इसके तहत अनिवार्य रूप से नेपियर घास का रोपण कराया जाये। जिससे पशुओं को पोष्टिक हरा चारा वर्ष भर मिलता रहे। बैठक के दौरान बताया गया कि नेपियर घास एक बार लगाने के पश्चात् बार-बार कटिंग करने के उपरांत भी लगभग 5 साल तक चलती रहती है। वही इस चारा में पर्याप्त मात्रा में पोष्टिक तत्व भी विद्यमान होते है। जिससे पशु इन्हे अच्छी तरह से खाते है एवं उन्हे पर्याप्त पोष्टिक तत्व भी सहजता से मिलते है।

      इसी प्रकार कलेक्टर ने बैठक में बताया कि निर्माणाधीन गौशालाओं के पास ही परम्परामगत रूप से चरनोई की भूमि का भी ध्यान रखा गया है। अतः गौशाला निर्माण के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाये कि किस प्रकाार गौशाला के पशु इन चरनोई की भूमि पर, बिना किसी किसान के खेत में प्रवेश करे पहुंचेगे। आवश्यक होने पर चरनोई भूमि तक पशुओं हेतु पहुंच मार्ग भी सुनिश्ति कराया जाये।

     उल्लेखनीय है कि जिले में शासकीय रूप से ग्राम तलवाड़ा बुजुर्ग, बड़सलाय, बड़गांव (सेंधवा), बिलवानी, कुसमिया में गौशालाओं का निर्माण तेजी से चल रहा है। आगामी कुछ माहों मे इन गौशालाओं का निर्माण पूर्ण हो जाने पर इनमें लगभग 500 पशुओं को रखा जाने लगेगा।

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