बड़वानी/भारत सरकार के द्वारा चयनित आंकाक्षी जिला बड़वानी में आदिवासी उप योजनान्र्तत चना फसल को प्रथम पंक्ति प्रदर्षन हेतु लिया गया है । केन्द्र के प्रमुख वैज्ञानिक डाॅ एस. के. बड़ोदिया के मार्गदर्षन में जिले के आदिवासी कृषकों हेतु चना फसल की उन्नत उत्पादन तकनीक पर प्रषिक्षण एवं आदान वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया । इस अवसर पर डाॅ. बड़ोदिया ने कहा कि चना फसल में बीजोपचार आवष्यक है जिससे उत्पादन में वृद्वि के साथ-साथ कीट-व्याधी का प्रकोप भी कम होता है । इस अवसर पर केन्द्र के वैज्ञानिक डाॅ.डी. के. तिवारी ने कृषकों को अपने खेत पर सिचांई हेतु सुक्ष्म सिंचाई (ड्रिप) पद्वति अपनाना पर जोर दिया, डाॅ. तिवारी ने इसके फायदे बताते हुए कहा कि ड्रिप सिचांई से 30-80 प्रतिषत तक पानी की बचत की जा सकती है इस बचे हुए पानी से अधिक क्षेत्र में सिंचाई की जा सकती है । साथ ही ड्रिप इन लाइन पद्वति से 30-45 प्रतिषत रासायनिक खाद की जरूरत में कमी आती है जिससे फसल की लागत कम होती है व रासायनिक खाद सीधें एवं उचित मात्रा में पौधो को मिलती है । इसके साथ ही पानी सीधें पौधे की जड़ में पहूॅंचता है इस कारण आस-पास खरपतवार नहीं उग पाते व पौधों का समूचित (स्वास्थय) विकास होता है जिससे कीटनाषक, फंफुदीनाषक आदि की कम मात्रा में आवष्यकता पड़ती है जो फसल की लागत में कमी लाती है । आदिवासी परियोजना के प्रभारी डाॅ. डी. के. जैन ने इस अवसर पर कहा कि वैज्ञानिक विधि अपनाते हुए खेती करने लागत में कमी लाई जा सकती एवं उत्पादन में वृद्वि होती है । इसके पश्चात् कृषकों को कृषि आदान का वितरण किया गया ।
