बड़वानी /बात बच्चों की देखभाल की होती है तो सर्वप्रथम माँ का ही नाम सर्वपरि होता है, क्योंकि वह ही बच्चों को सही लालन-पालन और संस्कार देकर बच्चे के सही आरंभिक विकास की शिल्पकार होती है। ऐसे में हम बात करें जन्मजात विकृति एवं बच्चे के विकास के विलंब की तो माँ के साथ-साथ पिता व परिवार के अन्य सदस्यों को अतिरिक्त कौशल के साथ ऐसे बच्चों का तराशना अहम हो जाता है। उक्त बातें सामाजिक न्याय एवं निःशक्तज कल्याण अंतर्गत आशाग्राम ट्रस्ट द्वारा संचालित जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र पर आयोजित विशेष बच्चों के अभिभावकों से संवाद बैठक के दौरान केन्द्र के निदेशक मणीराम नायडू एवं प्रशासकीय अधिकारी श्रीमती नीता दुबे ने कही। संवाद के दौरान अभिभावकों से पुनर्वास केन्द्र पर थेरेपी प्राप्त करने के बाद बच्चे में हो रहे बदलाव के विषय में विशेषज्ञों की उपस्थिति में विचार साझा किये गए वहीं काॅकलियर इंप्लांट के आॅपरेशन के बाद थेरेपी प्राप्त कर रहे बच्चों के माता-पिता ने खुशी का इजहार करते हुए अपने बच्चों में शब्दों के प्रस्फूटन एवं श्रवण क्षमता में सुधार को सकारात्मक बताया। इस दौरान आॅडियोलाॅजिस्ट दीपेन्द्र पटेल व एमआर प्रशिक्षक  विकास श्रीवास्पत ने पालकों से बच्चों को प्रशिक्षण के दौरान सिखाए जा रहे कौशल को घर पर भी दोहराने के लिए आवश्यक सुझाव दिए। वहीं इयर मोल्ड टेक्निशियन श्रीमती आशा पटेल के द्वारा बच्चों के लिए आवश्यक व्यायाम के साथ-साथ बच्चों के लिए सौहाद्रपूर्ण परिवेश की जानकारी दी।

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