बड़वानी / सकल दिगंबर जैन समाज के द्वारा पर्युषण महापर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है इसी तारतम्य में आज पर्युषण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म एवम प्रभु श्री पुष्पदंत भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव को भी धुमधाम से मनाया गया।
उत्तम शौच धर्म का मतलब शुचि का जो भाव ही मन से सब लोभ दूर करना, जिस प्रकार अत्यंत घृणित मद्य से भरा घड़ा यदि बहुत बार शुद्ध जल से भी जाए तो वह शुद्ध नही हो सकता, उसी प्रकार मनुष्य बाह्य में गंगा, पुष्कर आदि तीर्थो में स्नान करने से शुद्ध नही हो सकता जब तक वह अंतःकरण से क्रोध, कषाय, मान आदि का त्याग न करे, इसलिए मनुष्य का सबसे प्रथम धर्म है अपने अंतःकरण को शुद्ध करना क्योंकि जब तक वह अंतःकरण से शुद्ध नहीं होगा तब तक उसकी सारी बाह्य क्रिया व्यर्थ है, अतः लोभ का त्याग कर शौच धर्म का पालन करना ही उत्तम शौच है।

इस पावन अवसर पर निम्न पुण्यार्जक परिवारों को सौभाग्य प्राप्त हुवा।
1/ श्री जी को विराजमान कि बोली 3535/ श्रीमान दयाचन्द जी रतन लाल जी पहाड़ियां परिवार
2/प्रभु के प्रथम अभिषेक की बोली 3131 /श्रीमान रूपेश कुमार राजमल जी जैन परिवार
3/प्रभु की शांतिधरा कि 4141/ कि बोली श्रीमान रूपेश कुमार राजमल जी जैन परिवार
4/प्रातः एवम सांयकाल की आरती की बोली 2121/ श्रीमान रुपेश कुमार राजमल जी जैन परिवार
5/पुष्पदंत भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य 2121/ श्रीमती कांता जी दयाचंद जी पहाड़िया परिवार।
सभी पुण्यर्जको के पुण्य कि खूब खूब अनुमोदना
उक्त जानकारी सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष श्री महेन्द्र कुमार पहाड़िया द्वारा दी गई।
