बड़वानी / अषाढ़ माह की पूर्णिमा के आठ दिन पूर्व अष्टमी से जैन धर्म का अष्टानिका पर्व प्रारंभ होता है और इन आठ दिनों को भी महा पर्व ही माना जाता है तथा इन्हीं दिनों से चातुर्मास भी प्रारंभ होता है , इसी कड़ी में पूरे विश्व में जहां भी साधु संत विराजित है उनके वर्षायोग चातुर्मास स्थापना का क्रम प्रारंभ है ,और दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पर  अंकलीकर परम्परा के प्रकृताचार्य  श्री सुनील सागर जी महाराज की शिष्य आर्यिका आगम मति जी माताजी विराजमान है  के भी वर्षायोग मंगल चातुर्मास की स्थापना बावनगजा सिद्ध क्षेत्र पर बड़ी धूम धाम से संपन्न हुई , चातुर्मास में हैं  संत एक स्थान पर ही विराजित हो जाते है और अपनी सीमा का निर्धारण कर लेते है उतना ही बिहार करते है ,क्योंकि वर्षा ऋतु में बहुत ही सूक्ष्म जीवो की उत्पत्ति होती है और वो विचरण करते है और उन छोटे छोटे जीवों का घात ना हो इस दृष्टिकोण और जीव दया के पार्टी सहिष्णुता रखने की वजह से एक ही जगह तप आराधना और साधना करते है , इन चार माह में तीर्थ क्षेत्र पर ज्ञान की गंगा बहेगी और विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, बौद्धिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, इस अवसर पर उपस्थित श्रावक श्राविकाओं ने शामिल हो कर धर्म लाभ लिया ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद दोशी और समाज जन ने आर्यिका माताजी को श्रीफल भेंट कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया और चातुर्मास मंगल कलश स्थापना हेतु निवेदन किया ,तत्पश्चात  आगम माताजी ने मंत्रोच्चार,धार्मिक अनुष्ठान के साथ मंगल कलश की स्थापना की ,प्रथम मंगल कलश किरण विनोद दोशी  बाकानेर,द्वितीय मंगल कलश चंदा देवी नेमीचंद जी (धामनोद),और तृतीय मंगल कलश विजया चांदमल जी मंडलोई बड़वानी परिवार को पुण्यार्जक बनने   का सौभाग्य प्राप्त हुआ । माताजी को वस्त्र भेंट करने का सौभाग्य माला मुकेश जैन बड़वानी और मंजू पवन दोशी बाकानेर को प्राप्त हुआ ,इस अवसर पर निमाड़,मालवा के श्रावक, श्राविकाओं और बावनगजा पर निवास रात कार्यालयनी स्टाफ और परिवार  ने सम्मिलित हो कर पुण्य अर्जित किया ।

उपरोक्त जानकारी मीडिया प्रभारी मनीष जैन द्वारा प्रदान की गई

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