बड़वानी /जीवन में उच्च सफलता प्राप्त करना हो तो किसी की नकल न करें। अधिक महत्व मूल का होता है, फोटो काॅपी का नहीं। आप अपने लिए उच्च लक्ष्य निर्धारित करें और उसे प्राप्त करके दुनिया के लिये आदर्ष बन जायें। मां नर्मदा इसका अप्रतिम उदाहरण है। अमरकंटक से छोटे स्वरूप में उद्भुत होकर क्रमषः विषाल रूप धारण करती है। सबसे प्राचीन सलिला युगों से जीवनरेखा बनी हुई है। उसके प्रवाह की अपनी अलग दिषा है। ये बातें अपनी तीसरी पैदल नर्मदा परिक्रमा के दौरान डाॅ. पी. एस. कापसे ने शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं से कही थीं। उनकी बातें अनुभवजन्य और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरक तथा उत्साहवर्धक रहीं। इसलिये शनिवार को इन बातों को महाविद्यालय के अन्य विद्यार्थियों से साझा किया गया। यह आयोजन प्राचार्य डाॅ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्षन में किया। कार्यकर्तागण प्रीति गुलवानिया, जितेंद्र चैहान, राहुल मालवीया, वर्षा मालवीया, ग्यानारायण शर्मा, राहुल वर्मा, ज्योति ओझा, नेहा शर्मा, जयप्रकाष सोलंकी, अंतिम मौर्य, दिया अलावे और कॅरियर काउंसलर डाॅ. मधुसूदन चैबे ने डाॅ. कापसे से तीन घंटे से अधिक संवाद करके विचारों के मोती संचित किये थे। डाॅ. चैबे ने विद्यार्थियों को डाॅ. कापसे के विचारों से अवगत करवातेे हुए कहा कि बहुत दूर स्थित मंजिल कुछ क्षणों में नहीं प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए लंबी यात्रा करनी होती है। यदि इस यात्रा को छोटे-छोटे पड़ावों में विभक्त करके पूरा किया जाये तो बिना थके मंजिल पर पहुंचना संभव हो सकेगा। प्रीति गुलवानिया ने बताया कि डाॅ. कापसे जी इसी महाविद्यालय में प्राचार्य थे, लेकिन उन्होंने अपने सेवा काल की समाप्ति के दस साल पहले स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले ली है और अब वे बड़े लक्ष्य की प्राप्ति में जुट गये हैं। खरगोन के निकट बीड़ में एक आश्रम स्थापित कर रहे हैं, जहां गरीब और अनाथ बच्चों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की निःषुल्क षिक्षा तथा आवास की व्यवस्था की जायेगी। यह जहां षिक्षा का केन्द्र होगा, वहीं आध्याात्मिक उत्थान का केन्द्र भी होगा। यह भी बताया कि डाॅ. कापसे ने नौकरी छोड़ दी है, लेकिन वे कॅरियर सेल के निःस्वार्थ कार्य से बहुत प्रभावित हैं और आजीवन इसके सदस्य बने रहेंगे। डाॅ. कापसे कॅरियर सेल के माध्यम से काॅलेज के युवाओं को भी निरंतर मार्गदर्षन देते रहेंगे। साथ ही डाॅ. कापसे ने यह भी बताया कि नर्मदा परिक्रमा के क्रम में वे जहां विश्राम करते हैं और बातचीत में बड़वानी काॅलेज का उल्लेख करते हैं तो वहां के व्यक्ति बड़वानी के कॅरियर सेल के बारे में पूछते हैं। इस तरह यह कॅरियर सेल अपने कार्यों की वजह से दूर दूर तक जाना जाता है। डाॅ. कापसे की यह बात सुनकर कॅरियर सेल के कार्यकर्ता उत्साहित हैं और अधिक मनोयोग से कार्य करने के लिए संकल्पित हैं।
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