भोपाल। आयुष्मान भारत योजना के तहत महिलाओं की बच्चेदानी निकालने में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर की तैयारी है। इसके अलावा अस्पताल की मान्यता भी निरस्त की जाएगी। आयुष्मान भारत योजना का संचालन करने वाली स्टेट हेल्थ एजेंसी ने उज्जैन के क्षेत्रीय संयुक्त संचालक को आरोपित डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने व इसके बाद अस्पताल की मान्यता निरस्त करने के लिए पत्र लिखा है।

गुरुनानक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में साल भर के भीतर 539 महिलाओं की बच्चेदानी निकालने (लेप्रोस्कोपिक हिस्टेक्टामी) का मामला सामने आया था। उस क्षेत्र के तीन और अस्पतालों को भी इस सर्जरी के लिए मान्यता है, लेकिन वहां साल भर में 200 ऑपरेशन ही हुए हैं। आयुष्मान योजना के साफ्टवेयर से यह आंकड़ा मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने डॉक्टरों की टीम बनाकर इसकी जांच कराई। जांच में सामने आया है कि अस्पताल द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों कैंप लगाकर मरीजों को चिन्हित किया जाता था। जांच में करीब 300 महिलाओं का ऑपेरशन संदेह के घेरे में है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने अपने पक्ष में सभी मरीजों की वीडियोग्राफी व बीमारी के दस्तावेज दिए हैं। आयुष्मान भारत योजना सीईओ डॉ. जे विजय कुमार ने बताया कि अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय संयुक्त संचालक को पत्र भेजा है।

जबलपुर के मेट्रो हॉस्पिटल के खिलाफ भी होगी कार्रवाई

मध्य प्रदेश के कई अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत ज्यादा पैसा लेने की शिकायत आ रही है। जबलपुर के मेट्रो अस्पताल की सबसे ज्यादा शिकायतें आ रही हैं। अस्पताल को इसके लिए नोटिस भी दिया गया है, पर शिकायतें कम नहीं हो रही है। अब अस्पताल का योजना के तहत अनुबंध खत्म करने से लेकर मान्यता निरस्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

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