बड़वानी / अद्वितीय संस्कृति परंपरा एवं धर्म की प्रतिमूर्ति हमारे सांसारिक व्यवहारिक जीवन को सरल सहज, सुगम, नियम निर्देश प्रदान कर वेल के 11 नियम देने वाली आई पंथ की आराध्य देवी सीरवी समाज की कुलदेवी जगत जननी महामाया आदिशक्ति केसर दात्री श्री आई माता जी के 605 वे प्रकट उत्सव “दिवस को सभी समाज जनों ने घर पर ही मनाया।
सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया की प्रार्थना की। प्रतिवर्ष जुलूस निकलता था और हर्षोल्लास से मनाते थे लेकिन कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को देखते हुए सीरवी समाज जनों ने घर में ही मनाने और शाम में प्रत्येक घर में दीप जलाकर मनाने का निर्णय लिया। माता जी के जन्मोत्सव पर समाज के प्रतिभाशाली प्रत्येक बच्चे का सम्मान किया जाता था, रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता था, दिन भर विभिन्न आयोजन होते थे और महा प्रसादी का वितरण होता था। गांव में विशेष जुलूस भी निकाले जाते थे लेकिन समाज जनों ने सभी कार्यक्रम निरस्त कर सिर्फ पंडित वरिष्ठ समाज के दो व्यक्तियों के द्वारा पूजा पाठ कर गांधी चढ़ाकर भोग लगाया। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर मास्क लगाकर समाज जनों ने अलग-अलग समय में जाकर माताजी के दर्शन किए। व घर पर ही माता जी का जन्मोत्सव मनाने का निर्णय लिया।
