केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जहां सोशल मीडिया पर सरकार की गाइडलाइन के बारे में बताया वहीं केंद्रीय सूचना तथा प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने OTT प्लेटफॉर्म से जुड़ी नई व्यवस्था के बारे में बताया। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया पर गलत चीजें परोसी जा रही है। सोशल मीडिया कंपनियों का स्वागत है, वो आएं और यहां बिजनेस करें, लेकिन गलत काम नहीं करने देंगे। हिंसा के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया जा रहा है। फेक न्यूज परोसी जा रही है। यही कारण है कि सरकार को यह गाइडलाइन तैयार करना पड़ी है। सोशल मीडिया को लेकर बहुत शिकायतें आ रही हैं। लड़के और लड़कियों के ऐसे फोटो दिखाए जा रहे हैं, जिन्हें हमारा समाज स्वीकार नहीं कर सकता है। सरकार ने इसके लिए एक कानून बनाया है जो तीन महीने में लागू हो जाएगा।

OTT और डिजिटल मीडिया के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट को लेकर सैकड़ों शिकायतें रोज आ रही हैं। संसद में सवाल पूछे जा रहे हैं। यही कारण है कि सरकार ने इस दिशा में नियम लेकर सामने आना पड़ा है। OTT को बताना होगा कि वे किस तरह से जानकार को प्रसारित कर रहे हैं। सरकार रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था नहीं बना रही है, लेकिन OTT पर काम करने वालों को यह जानकारी देना होगी। OTT पर 13+, 16+, A श्रेणी की व्यवस्था होगी, ताकि बच्चे इन्हें न देख सकें।

– सेंसर बोर्ड की तरह ओटीटी को खुद ही संहिता तैयार करनी होगी, जिसका वे पालन करेंगे

– ओटीटी पर चलने वाली मूवी को पांच आयु श्रेणियों यू (यूनिवर्सल), यू/ए 7+, यू/ए 13+,यू/ए 16+ और ए (एडल्ट) में बांटा जाएगा

– 13 साल से अधिक आयु श्रेणी वाली मूवी में पेरेंट लॉक की सुविधा देनी होगी

Social Media Guidelines की बड़ी बातें

– शिकायत मिलने के 24 घंटे में नग्नता, यौन गतिविधियों या छेड़छाड़ की गई तस्वीरों वाला कंटेंट हटाना होगा

– एक शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो 24 घंटे के भीतर शिकायतों का संज्ञान लेगा और 15 दिन में निपटारा करेगा

– अदालत या सरकार के आदेश के बाद ऐसी कोई जानकारी पब्लिश नहीं कर सकेंगे, जिस पर भारत की संप्रभुता व लोक हित को देखते हुए रोक लगाई गई हो

– यूजर की संख्या के हिसाब से इंटरनेट मीडिया कंपनियों को दो श्रेणियों इंटरनेट मीडिया इंटरमीडियरी और सिग्निफिकेंट इंटरनेट मीडिया इंटरमीडियरी में बांटा जाएगा। इसकी जानकारी जल्द दी जाएगी

– सिग्निफिकेंट इंटरनेट मीडिया इंटरमीडियरी को चीफ कंप्लायंस ऑफिसर, नोडल कांटेक्ट पर्सन और रेजिडेंट ग्रिवेंस ऑफिसर नियुक्त करना होगा। तीनों अधिकारियों को भारत में ही रहना होगा

– शिकायतों, इन पर की गई कार्रवाई और कंटेंट हटाने के मामले में इन्हें मासिक अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी

– स्वैच्छिक तौर पर यूजर्स के वेरीफिकेशन का मैकेनिज्म तैयार करना होगा। वेरीफिकेशन के बाद यूजर के प्रोफाइल पर स्पष्ट निशान लगाया जाएगा

– किसी यूजर की ओर से पोस्ट किए गए कंटेंट को हटाने से पहले उसे अपनी बात रखने का मौका देना होगा।

डिजिटल न्यूज साइट्स के लिए :

– डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म को अपने स्वामित्व से जुड़ी व अन्य सूचनाएं देनी होंगी

– इन्हें अपने लिए स्वनियामक तैयार करना होगा। साथ ही प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से तय पत्रकारिता की मर्यादाओं का ध्यान रखना होगा

– ऑफलाइन यानी प्रिंट व टीवी के साथ डिजिटल मीडिया का संतुलन बनाना होगा

– प्लेटफार्म पर अफवाह या गलत खबर पर रोक लगाने के लिए तीन स्तरीय शिकायत निपटान मैकेनिज्म होगा

– पहले स्तर पर प्रकाशक शिकायतों को सुनने व उस पर कार्रवाई के लिए अधिकारी नियुक्त करेगा। 15 दिनों में शिकायत का निपटान करना होगा

– दूसरे स्तर पर प्रकाशक स्वनियामक समूह तैयार करेंगे। सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज उस समूह के प्रमुख होंगे। समूह में छह से अधिक सदस्य नहीं होंगे। यह समूह सूचना प्रसारण मंत्रालय से पंजीकृत होगा

– तीसरे स्तर पर सूचना व प्रसारण मंत्रालय मैकेनिज्म तैयार करेगा। इसके तहत डिजिटल न्यूज को लेकर शिकायत सुनने के लिए अंतर-विभागीय कमेटी गठित की जाएगी

भारत सरकार के मुताबिक देश में इस वक़्त

व्हॉट्सऐप यूजर्स – 53 करोड़,

यूट्यूब यूजर्स – 44.8 करोड़,

फेसबुक यूजर्स – 41 करोड़,

ट्विटर यूजर्स – 1.75 करोड़,

और इंस्टाग्राम यूजर्स – 21 करोड़ हैं।

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