अंजड/ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की अंजड महाविद्यालय में विवेकानंद जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर पुष्पांजलि  कार्यक्रम का आयोजन किया, इस कार्यक्रम में मुख्यवक्ता अभाविप के विभाग सहसंयोजक प्रितमराज बड़ोले ने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर प्रकाश डाला वक्तव्य के दौरान उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी वचनों को दोहराते हुए कहा कि “हमें तब तक नहीं रुकना चाहिए जब तक अपने लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो जाती है”। स्वामी विवेकानंद ने भी यही बात वर्षों पहले कही थी कि “उठो जागो और चलो और तब तक चलो जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए”

युवाओ के चिर प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानन्द १२ जनवरी १८६३ को जन्मे नरेंद्र को बचपन से ही खेल-व्यायाम , संगीत और धर्म-दर्शन  में रूचि थी तथा निडरता और करुणा जन्मजात स्वभाव था | तर्कशील जिज्ञासु बुद्धि ने नरेंद्र को निराकार के उपासक ब्रह्म समाज से जोड़ा | आध्यात्मिक अनुसन्धान की प्यास ने स्वामी रामकृष्ण परमहंस से मिलवाया | समाज की निर्धनता ,रुग्णता , अशिक्षा,स्त्रियों की दुर्गति  और कुरीतियों ने करुणा से भरे  स्वामी जी को उपाय खोजने की और प्रवृत्त किया २५,२६,२७ दिसम्बर १८९२ कन्याकुमारी की शिला पर तीन दिन तीन  रात के सतत गहन ध्यान  उपरान्त स्वामी जी की अंतरात्मा ने  मार्ग प्रशस्त किया की भारत अपने महान धर्म और संस्कृति से विश्व में गौरव से खड़ा हो सकता है १८९३ में विश्व सर्व धर्म सम्मेलन के लिए स्वामी विवेकानन्द अमेरिका पहुंचे  पश्चिम के वैभव ने उन के करुणा भरे  मन में अपने देशवासियों की दशा सुधारने की दृढ़ता दी

११ सितम्बर १८९३ स्वामी जी के सम्बोधन ” अमेरिकी बहनों और भाइयों ” के सम्बोधन पर पूरे  दो मिनट करतल ध्वनी हुई , और सनातन दर्शन के आध्यात्मिक संदेश ने विश्व को मुग्ध कर दिया |

 अमेरिकी प्रेस ने स्वामीजी को धर्म संसद की महानतम विभूति बताया अमेरिका लोकप्रियता के शिखर पर  स्वामी जी का खूब स्वागत सत्कार हुआ स्वामी जी को ऐसे क्षणों में सदा अपने देशवासियों की निर्धनता याद आई और वे कई बार इस कारण व्यथित हो रोये भी विश्व धर्म सम्मेलन के उपरान्त अमेरिकी बौध्हिक जगत ने कहा ” ऐसे विद्वान राष्ट्र में मिशनरी भेजना निरी मूर्खता है , वहां से तो हमारे देश में धर्मप्रचारक आने चाहिए 

महर्षि अरविन्द कहते हैं ” स्वामी विवेकानन्द ने विश्व को पहला संकेत दिया की भारत जाग उठा है , जीवंत ही नहीं विजयी होने के लिए ” स्वामी जी ने न्यूयॉर्क में वेदांत सोसायटी की स्थापना की , राजयोग का लेखन किया , ज्ञानयोग पर व्याख्यान दिए | अमेरिका व् लन्दन के जाने माने व्यक्ति बनने के पश्चात स्वामी जी १८९७ में भारत लौटे  १ मई १८९७ को कोलकाता  में  ओपचारिक रूप से रामकृष्ण मठ की स्थापना की स्वामीजी के प्रेरनादायी विचार  और जीवन ने अनेक राष्ट्रीय  नेताओं एवं क्रांतिकारियों पर व्यापक प्रभाव डाला  ४ जुलाई १९०२ को स्वामी जी अपनी नश्वर देह त्याग अनंत में विलीन हो गये | भारत की आध्यात्मिक शक्ति से विश्व को झंकृत करा , जनसाधारण के उत्थान का संदेश दे , युवाओं को सांस्कृतिक गौरव से परिपूर्ण कर ,शिक्षा की महत्ता समझा कर स्वामी जी भारतीयों के सर्वकालिक प्रेरणास्रोत बन गए  स्वामी विवेकानंद जी का भारत माता के प्रति अटूट प्रेम अनेकानेक पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रोत्साहित करता रहा है ,करता रहेगा मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अंजड नगर के नगर कार्यवाह श्री ……… युग पुरुष पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि स्वामी जी ने भारत को परम वैभव पर स्थापित किया था भारत से बाहर वैदिक संस्कृति का परचम लहराया। 1893 में अमेरिका के शिकागो में दिए ऐतिहासिक भाषण से प्रभावित होकर कई अंग्रेज लोग भारत की संस्कृति से प्रभावित हुए तथा भारत आ गये।उन्होंने कहा था कि किसी भी चीज से मत डरो।  तुम अद्भुत काम करोगे यह निर्भयता ही है जो पल भर में आनन्द लाती है कार्यक्रम में नगर अध्यक्ष श्री रविराज चौहान ने मौजूद छात्रो का आभार प्रकट किया इस अवसर पर जिला सहसंयोजक हेमन्त पंवार नगर कार्यवाह शैलेन्द्र मण्डलोई नगर अध्यक्ष रविराज चौहान नगर मंत्री अमन सोलंकी,छात्रा प्रमुख दिव्या मण्डलोई आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।।

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