गुजरात में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी गई है। गुजरात में विधानसभा चुनाव 1 और 5 दिसंबर को होंगे और 8 दिसंबर को मतगणना होगी। चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान के बेहतर अनुभव के लिए, 1274 मतदान केंद्रों का प्रबंधन पूरी तरह से महिला और सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा किया जाएगा। 182 मतदान केंद्रो पर मतदाताओं का लोक निर्माण विभाग स्वागत करेगा। पहली बार 33 मतदान केंद्रों की स्थापना और प्रबंधन सबसे कम उम्र के मतदान कर्मचारी करेंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में निर्वाचन आयोग की तरफ से मोरबी की दुखद घटना से प्रभावित सभी लोगों और शोकाकुल परिजनों के प्रति शोक और संवेदना प्रकट किया और कहा कि हम प्रार्थना करते हैं कि मृतकों की आत्मा को शांति मिले। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस बार गुजरात विधानसभा चुनाव में 4.6 लाख नए वोटर अपने मत का प्रयोग करेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि दिव्यांगों के लिए विशेष पोलिंग बूथ की व्यवस्था की गई है, राज्य में सभी पोलिंग बूथ ग्राउंड फ्लोर पर ही रहेंगे। चुनाव आयोग ने एक बड़ा ऐलान कर कहा कि इस बार के गुजरात चुनाव में किसी भी मतदाता द्वारा शिकायत करने पर 100 मिनट में जवाब दिया जाएगा। सी-विजिल एप पर वोटर शिकायत कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी जानकारी दी कि 18 फरवरी 2023 को गुजरात विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है।
गुजरात में 27 साल से भाजपा की सरकार
गौरतलब है कि गुजरात को भाजपा का गढ़ माना जाता है और राज्य में बीते 27 साल से भाजपा की सरकार है। आपको बता दें कि गुजरात में बीते विधानसभा चुनाव में दो चरणों में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए थे। गुजरात विधानसभा की 182 सीट के लिए चुनाव दिसंबर तक होने वाले हैं और इसके लिए चुनाव आयोग लंबे समय से तैयारियों में जुटा हुआ है।
हिमाचल के साथ नहीं कराए गुजरात चुनाव
गौरतलब है कि हाल ही में चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था लेकिन तब साथ में गुजरात विधानसभा चुनाव कार्यक्रम का ऐलान नहीं किया था। चुनाव आयोग हिमाचल प्रदेश में एक ही चरण में विधानसभा चुनाव संपन्न करा रहा है। हिमाचल प्रदेश में आने वाले कुछ समय में मौसम में बड़ा फेरबदल होने की संभावना के चलते चुनाव आयोग ने चुनाव तारीखों का ऐलान जल्द कर दिया था। पहाड़ी राज्य होने के कारण राज्य में बर्फबारी शुरू हो जाती है और राज्य के अंदरूनी इलाकों में चुनाव संपन्न कराने के काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
