बड़वानी/ नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों की जिस तरह से अधिकृत/ बिना हस्ताक्षर व सील ठप्पे के मिडिया ग्रुपो के माध्यम से घोषणाऐं हुई है उसने कांग्रेस के कमजोर संगठन की पोल खेलकर रख दी। उक्त तरीका जनता-जनार्दन और स्वंय कांग्रेस के लोगो के बीच ंहंसी-ठिठोली का विषय बनकर रह गया। जबकि नगरीय निकाय चुनाव का काफी कुछ असर इस साल के अंत में होने वाले विधान सभा पर पड़ सकता है। चर्चा है कि कांग्रेस में संगठन नाम की कोई चीज ही नही है। कहा जा रहा है कि जिले में कांग्रेस संगठन का यही हाल रहा तो आने वाले विधान सभा चुनाव में कांग्रेस का बंठाधार होने से कोई नही रोक सकता है। एक और तो प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी पार्टी के चुनाव प्रभारियों, पंचायतो में चुने गये पार्टी के सरपंचों आदि का सम्मेलन आयोजित करके आगामी विधान सभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे है। विधायको और विधान सभा सीटो पर गोपनीय सर्वे करा रहे है और दूसरी और बड़वानी जिला संगठन की हालत बड़ी दयनीय स्थिति में देखी जा सकती है। चर्चा तो यह भी है कि वर्तमान कांग्रेस जिलाध्यक्ष ठीक से संगठन ही नही चला पा रहे है यही कारण है कि वर्तमान में कांग्रेस बिखरी हुई पड़ी है। कहा जा रहा है कि वर्तमान जिलाध्यक्ष की पहुॅच केवल देवला-जुलवानिया तक ही सीमित है। खैर जो भी हो ? लेंकिन नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी के जिलाध्यक्ष की निष्क्रियता ने तथा उम्मीदवारो की घोाण के तरीको ने जिले में कांग्रेस के कमजोर संगठन की पौल तो खोलकर रख दी है।
