नर्मदा जीवनशालाओ के 26 वे बालमला के उद्घाटन कार्यक्रम में महाराष्ट्र के एवं मध्यप्रदेश के 500 आदिवासी बच्चो के गीत, तथा कबड्डी, खो-खो की प्रतियोगिता अनोखे उत्साह के साथ शुरू हो चुकी है ।आज शाम सात बजे नाट्य, नृत्य ,गीत की प्रतियोगिता भी होगी। धुलीया से यशवंत अकॅडमी, अहमदनगर से बाबा आमटे सामाजिक विकास संस्था तथा अमरावती से ‘प्रश्नचिन्ह’ जैसे पारधी समाज के बच्चो के लिए बरषोसे चलाई जा रही प्रयोगशील शाळा के शिक्षक /शिक्षिका व कुछ विद्यार्थी भी इस बार बालमेला मे शामिल हुए है।

उद्घाटन मे शामिल पद्माकर वलवीजीने एक पर्यावरण प्रेमी सामाजिक कार्यकर्ता की हैसीयतसे बात रखते हुए कहा कि , नर्मदा आंदोलन की संघर्ष और निर्माण की समन्वय की प्रशंसा की । पुनर्वसन मे हुये पौधारोपण और जैविक खेती को सरहाते हुए उन्होने जल , जंगल , जमीन के अधिकार को शिक्षा में सम्मिलित करना उनके वक्त नही होता था लेकिन जरुरी है स्पष्ट किया।
अनिल कुवर ,दादाभाई पिंपळे ,चुनीलाल ब्राह्मणे एवं तात्याजी पवार जो फुले-शाहु- आंबेडकर मंच के साथी है। उन्होने कहा की आदिवासी विद्यार्थीयोको व वंचित न राहणे देना तथा उन्हे शिक्षा के अधिकार मे प्राथमिकता देकर आज की बेरोजगारी, महंगाई जैसी समस्याओसे घेरे समाज मे स्वावलंबी बनाना और भविष्य के लिए सक्षम करना जरुरी है ,जो जीवनशालाओ से हासील हो रहा है।
विजया चव्हाण जो भूतपूर्व युनिसेफ अधिकारी एवम नर्मदा नवनिर्माण अभियान की ट्रस्टी है, उद्घाटन के लिए मुंबई से पहुची।उन्होने जीवनशालाओके लिए जिदसे, कटिबद्धतासे चलाने का संकल्प व्यक्त करते हुए उपस्थितताओको जनसहयोग का एलान किया।

वरिष्ठ पत्रकार पुष्पराज जीने नर्मदा आंदोलन के सालो के संघर्ष के गवाह के नाते कहा कि देश के कई समस्यांओपर विस्थापितोंकी साथ देकर आंदोलनने विकास को बढाया है और विनाश को रोका है । नर्मदा जीवन शालांओका कार्य 30 सालो से चलते हुई आज तक ऊर्जा बचाकर चल रहा है जिसमे भविष्य निर्माण की क्षमता होते हुए सतपुडा के आदिवासीयोंकी एक पिढी आगे बढी है।
उपस्थितीयो मे रंजना कान्हेरे ,संदीप देवरे, प्राध्यापक जयसिंगराव शिंदे थे सभी ने नर्मदा नवनिर्माण अभियान के कार्य पर झुटे आरोप लगाकर किचड उछालनेकी कोशिश का धिक्कार करते हुए कहा की आंदोलन के संघर्ष में तथा निर्माण में सही नजरिया ,पारदर्शकता एवं इमानदारी का इतिहास प्रस्तुत किया ।पुणे से श्री भिडे ,श्री संजय मा. क. कुछ सरकारी अधिकारी शामील हुए।

धडगाव से नंदुरबार जिल्हा पंचायत के सदस्य विजय पराडके ,काथर्डे दिगर की सरपंच कोमाबाई ,पंचायत समिती शहादा के सभापती वीर सिंग भाई, सदस्य नीमाताई पटले आदी तथा पुनर्वसाहटो मेसे जिवननगर,थुवानी, रेवानगर, नर्मदानगर के सरपंच भी उपस्थित रहे। प्राध्यापक रमेश जाधव कोल्हापूर से आकर जीवनशाला ओके प्रशिक्षण कार्य मे सहयोग देने का आश्वासन दिया।
बाबा आमटे की पुण्यतिथी के अवसर पर उन्हे श्रद्धांजली देते हुए “शुखला पायी असू दे ” का बाबा आमटे जी का गीत चेतन सालवे ने प्रस्तुत किया । इस कार्यक्रम के दौरान क्रीडा स्पर्धा का संचालन लतिका राजपूत ने किया तथा शिक्षक मांगू पावरा व रोहिदास पावरा लालसिंग वसावेने स्वागत व प्रस्तावना की। वंचितो की शिक्षा के संबंधमें सुलभाताई मोरे ,ओंकार पवार व शुभांगी ताई झेंडे अपने अनुभव पेश करते हुए जीवनशालाओके योगदान पर प्रशंशा के वक्तव्य दिये।
कार्यक्रम में मेघाताई पाटकर व ओरसिंग गुरुजींने समारोप मे आंदोलन के संघर्ष और निर्माण की ताजा स्थिती बताते हुए सभी के सहयोग और सहभाग के लिए धन्यवाद दिये। बालमेला 12 ऑक्टोबर के रोज दो बजे के समारोप कार्यक्रम तक जारी रहेगा ।काथरदेदीगर वसाहत, रेवानगर ,नर्मदा नगर ,डनेल, मनीबेली एवम चिमलखेडी का विशेष सहयोग से बालमेला का कार्यक्रम आगे बढ रहा है।
उद्घाटन कार्यक्रम को फेसबुक लाईव्ह करने के लिए राजा मंडलोई और व्हिडिओ वाल्युंटिअर्स के विनोद वानखडे इन्होने भागदौड की, गृहनिर्माण पर वैकल्पित वस्तूओंका प्रदर्शन ,जीवनशाला के विद्यार्थी ओके बनाये हुये वस्तू का प्रदर्शन के स्टॉल बाल मेला मे लगे है।
