बड़वानी / आज अंजड़ नगर के शासकीय महाविद्यालय (स्वामी अमूर्तानंदपुरी जी महाविद्यालय) में मां रेवा आश्रम मोहीपुरा के परम पूज्य संत स्वामी अमूर्तानंदपुरी जी की प्रतिमा का भूमिपूजन खरगोन-बड़वानी लोकसभा सांसद गजेंद्र पटेल द्वारा विधिपूर्वक संपन्न किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वामी अमूर्तानंदपुरी जी के विचार और उनके द्वारा समाज के लिए दिए गए योगदान से  समूचे समाज को मानव सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

सांसद पटेल ने अपने संबोधन में जोर देते हुए कहा, “सभी विद्यार्थियों को स्वामी जी के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करके आगे बढ़ना चाहिए। उनके आदर्श हमें सिखाते हैं कि सच्ची मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। स्वामी अमूर्तानंदपुरी जी ने संघ के प्रचारक के रूप में समाज को संगठित किया और अपने कर्म से हमें यह सिखाया कि समाज के कल्याण के लिए स्वयं को समर्पित करना ही जीवन का उद्देश्य होना चाहिए।”

इस मौके पर सांसद पटेल ने स्वामी जी के जीवन से जुड़े कुछ अनमोल प्रसंगों को भी साझा किया और बताया कि कैसे पूज्य माधवराव गुरुजी के निर्देश पर स्वामी अमूर्तानंदपुरी जी ने ग्राम मोहिपुरा को अपनी कर्मस्थली बनाया और वहां से उन्होंने समाज के उत्थान के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा, “आज मुझे पूज्य स्वामी जी की प्रतिमा का भूमिपूजन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जो मेरे लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का क्षण है। यह प्रतिमा न केवल स्वामी जी के योगदान को याद दिलाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित करेगी।”

 कौन थे स्वामी अमुर्तानंदपुरी जी

स्वामी अमुर्तानंदपुरी जी का जन्म बुध्दपुर्णिमा 22 मई 1889 मे काशी मे हुआ था।छात्र जीवन मे स्वामी विवेकानंद के स्वदेश लौटने पर बग्घी खीचकर ले जाने वाले युवाओ मे से एक थे स्वामी जी ,  युवावस्था से कलकत्ता मे क्रांतिकारी जीवन प्रारंभ किया। 1911 मे प्रयाग विश्वविद्यालय  से अर्थशास्त्र मे MA कर कुछ समय तक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मे प्रोफेसर रहे।*  1912 मे स्वामी विवेकानंद के गुरू भाई स्वामी अखण्डानंदजी के शिष्य बने रामकृष्ण मिशन के सन्यासी के रूप मे 16 देशो मे हिन्दुसंस्कृति का प्रचार किया। नागपुर मे मिशन का कार्य देखते समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माधव गोवलकर को स्वामी अखंडानंद से जोडा माधवराव गुरुजी ने भी गुरू दीक्षा स्वामी अखंडानंद जी से प्राप्त की अत: दोनो गुरू भाई बने।

माधव जो गुरूजी के नाम से प्रसिद्ध हुए उनके कहने पर ही स्वामी अमुर्तानंदपुरी जी ने ग्राम मोहीपुरा को कर्मस्थली बनाया। स्वामी जी ने  बिजली,  डाकतार, पक्का रास्ता, कन्याशिक्षा,  बालसंस्कार और स्वास्थ्य सेवा जैसे आदि कार्य समाज के लिए किए।

उक्त अवसर पर लक्ष्मण धनगर अमूर्तानन्दपूरी जी आश्रम परिसर अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष  राजा चौहान, नगर परिषद अध्यक्ष मांगीलाल मुकाती,  विठ्ठल पाटीदार (मामा), जनपद अध्यक्ष  मनोहर आवास्या, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि  रमेश यादव , राधेश्याम पाटीदार, आईटी सेल अध्यक्ष राजा और अन्य जनप्रतिनिधिगण,  महाविद्यालय परिवार, छात्र-छात्राएं और अंजड़ नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

 

 

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