बड़वानी / भारत भूमि सदैव तप-त्याग और संयम की भूमि रही है। यह भूमि आज भी ऐसे महान विभूतियों से सुशोभित है। हालांकि महापुरुषों को कभी परिचय की आवश्यकता नहीं होती है, उनका कृतित्व ही उनके व्यक्तित्व की कहानी जन-जन को प्रदर्शित करता है। संत शिरोमणी आचार्य 108 श्री विद्यासागर जी महाराज, नवाचार्य 108 श्री समयसागर जी महाराज एवं गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी भी उन्हीं महापुरुषों में है जिनके व्यक्तित्व को सदियों तक याद किया जाएगा। ऐसे महापुरुषों का अवतरण एवं दीक्षा दिवस नैतिक और धार्मिक जीवन जीने का संदेश प्रदान करता है।
संत शिरोमणी आचार्य गुरुवर 108 श्री विद्यासागर जी महामुनिराज, प.पू.नवाचार्य गुरूवर 108 श्री समयसागर जी महाराज के अवतरण दिवस तथा गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के 73 वें संयम दिवस एवं 91 वें अवतरण दिवस शरद पूर्णिमा के पावन प्रसंग पर सकल दिगम्बर जैन समाज, बड़वानी द्वारा उक्त द्वय आचार्य एवं विश्व को आलोकित करने वाली युग की महान धरोहर गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के श्री चरणों में कोटि कोटि नमन वंदन करता है तथा नवाचार्य एवं सबसे प्राचीन दीक्षित पूज्य ज्ञानमती माताजी के सुस्वास्थ्य एवं दीर्घायु की मंगल कामना करते हैं।
समाज अध्यक्ष महेन्द्र पहाड़ियां ने बताया कि इस शरद पूर्णिमा के महान दिवस पर बड़वानी सकल जैन समाज के द्वारा सुबह 8 बजे से गुरु पूजन किया गया और रात्रि में 1 घंटे का नमोकार महामंत्र का पाठ किया गया।
