बड़वानी (निप्र) संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री आर्जव सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका प्रतिभा मति जी माताजी और संघस्थ आर्यिका सुयोग मति जी माताजी और आर्यिका मार्मिक मति जी माताजी का आज प्रातः अंजड़ की ओर से बड़वानी में मंगल प्रवेश हुआ जहां समाज जन ने माताजी की आगवानी कर मंगल प्रवेश करवाया माताजी ने बड़वानी खंडेलवाल दिगंबर जैन मंदिर पहुंच कर भगवान के दर्शन कर धर्म सभा को संबोधित किया माताजी ने कहा कि आप बड़े भाग्य शाली हो जो सिद्ध क्षेत्र के पास पवित्र भूमि पर विराजते हो जहां साधु संतों के दर्शन और सेवा करने का पुण्य लाभ बगैर पुरुषार्थ के मिल जाता है,बड़वानी के लोगों की भक्ति और भावना भी बढ़िया है, संतो का समागम करना,पूजन,भक्ति अर्चन करना बहुत दुर्लभ है तथा धन ,वैभव परिवार सुलभ है। भगवान के दरबार में आना और साधु संतों के साथ आना ये पुण्य शाली धरती ही होती है जहां ये होता है।

हम जीवन में लौकिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा पाप करते है नई पीढ़ी को मंदिर लेकर आओ तो वो कहते है कि हमने कौन सा पाप किया है,आप अपने घर को कपड़ों को शरीर को साफ रखते हो पर आत्मा की सफाई के लिए क्या करते हो पापों के माध्यम से कषाय के माध्यम से आत्मा गंदी हो रही है उसको साफ करने के लिए कभी ध्यान दिया क्या? उसके साफ करने के लिए आचार्य परमेष्ठि ने 6 प्रकार के कार्य बताए है देव पूजा,गुरु की उपासना,स्वाध्याय,संयम,तप,आदि ।
आगे आर्यिका श्री ने बताया कि जैन धर्म जाती नहीं है धर्म है ,अन्य जाति के लोग भी धर्म के अनुसार जो जिनेन्द्र भगवान के अनुसार चले तो वो जैन हैं,अभी ये पर्यूषण चल रहे है और ये साल में तीन बार आते है और हर चार माह में आते है और उत्तम क्षमा से प्रारंभ होते है और उत्तम क्षमा से ही समाप्त होते है अतः हर चार महीने में क्षमा मांग लेना चाहिए और अपनी कषाय को शांत कर लेना चाहिए जिससे भव भव तक भोगने वाले पाप से बच जाएंगे धर्म भी एक आग है जिसके माध्यम से अपनी आत्मा का जलयान कर सकते है और धर्म क्षेत्र में आकर पाप करने से अपना सर्वनाश भी कर सकते है।और ये पाप,कषाय भव भव तक भटकाएगा,।
आज आर्यिका माता जी के दीक्षा गुरु आचार्य आर्जव सागर जी का भी दीक्षा दिवस है तो आचार्य श्री विद्या सागर जी और आचार्य श्री आर्जव सागर जी का पूजन समाज जन ने अष्ट द्रव्य से तस्वीर के आने अर्ध चढ़ा कर किया मंगलाचरण बबीता काला ने किया ,आर्यिका माताजी सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी के दर्शनार्थ पधारी है माताजी देवास जिले के हाटपीपल्या नगर में चातुर्मास समाप्त कर पद विहार करती हुई सिद्धवर कूट, पावागिरी ऊन के दर्शन करते हुए पद विहार करते पधारी है।
उपरोक्त जानकारी मनीष जैन ने प्रदान की
