बड़वानी  / स्थानीय निवासी और समाजसेवी रईस खान ने सुन्नत मुस्लिम जमात, बड़वानी के सदर अब्दुल कदीर पटेल, नायब सदर साजिद टायर, सचिव एवं शासकीय शिक्षक जावेद खान सहित काबिना कमेटी के सदस्यों पर मदरसा अनुदान और चंदे की राशि में गम्भीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि जिन शिक्षिकाओं को मदरसों में कार्यरत दिखाया गया है, वे ही शिक्षिकाएं निजी संस्था ‘सेंट हलीमा स्कूल’ में भी कार्यरत हैं। इनमें प्रमुख रूप से सोफिया बदरूज्ज़माँ शेख, नुसरत, गुलनाज़ मेमन, और शाहीन रियाज़ शेख के नाम शामिल हैं। इन शिक्षिकाओं ने पुलिस को दिए कथनों में निजी विद्यालय में कार्यरत होने की बात स्वीकार की है। रईस खान ने यह भी आरोप लगाया कि सदर और सचिव के कहने पर उन्हीं शिक्षिकाओं से उनके खिलाफ असत्य कथन दिलवाए गए हैं और उन्हें भय है कि भविष्य में उनके विरुद्ध झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जमात के चंदे का सार्वजनिक हिसाब पहले मस्जिदों में लगाया जाता था, जो अब छह महीने से नहीं लगाया गया है, जबकि पुलिस में दिये गए कथनों में इसे नियमित बताया गया है।

सामाजिक बहिष्कार और मानसिक प्रताड़ना का आरोप:-

रईस खान के अनुसार, उन्होंने इन अनियमितताओं के विरुद्ध लगातार आवाज उठाई, जिससे उन्हें सामाजिक बहिष्कार और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। जमात कार्यालय से उनके इज्तेनाब (बहिष्कार) का लिखित ऐलान किया गया, जिससे उनके पारिवारिक और सामाजिक संबंध भी प्रभावित हुए हैं।

जमात का पक्ष: –

सुन्नत मुस्लिम जमात बड़वानी ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि वर्ष 2022 के बाद से मध्यप्रदेश मदरसा बोर्ड से कोई अनुदान नहीं मिला है, और मदरसों तथा सेंट हलीमा स्कूल का संचालन समाज से प्राप्त चंदे के माध्यम से किया जा रहा है। जमात ने रईस खान के विरुद्ध पूर्व में थाना बड़वानी में मामला दर्ज कराया था, जो न्यायालय में लंबित है, साथ ही 1 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भी भेजा गया है।

रईस खान की मांग:-

उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और समाज में पारदर्शिता स्थापित करने की मांग की है, ताकि बच्चों के भविष्य और समाज के हितों की रक्षा हो सके।

 

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