बड़वानी / अनुसूचित जाति और जनजाति के एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान अनुसूचित जनजाति मोर्चा,भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री,एवं सांसद (लोकसभा) खरगोन-बड़वानी (म.प्र.) गजेन्द्रसिंह पटेल ने विषय रखते हुआ कहा – हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कहा है कि विशेष परिस्थिति में बच्चे की मां की जाति के आधार पर भी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र दिया जा सकता है।
न्यायपालिका का सम्मान हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल है, लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि नीति निर्माण का अधिकार संसद के पास रहे। यह फैसला पूरे देश में जातिगत प्रमाण पत्र की व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। जाति प्रमाण पत्र जारी करने का आधार मुख्यतः पितृवंशी परंपरा रहा है। यदि इसे बिना स्पष्ट दिशा-निर्देश बदला जाता है, तो राज्यों में भ्रम, विवाद और बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की आशंका हो सकती है। वहीं लव जिहाद और धर्मांतरण पर भी अनुसूचित जाति और जनजाति पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
मेरा सरकार से आग्रह है कि सरकार इस फैसले का व्यापक अध्ययन करे। दूसरा, जातिगत निर्धारण के नियमों पर एक स्पष्ट और समान राष्ट्रीय नीति लाए। और यदि आवश्यक हो, तो संसद में एक नया कानून या संशोधन लाए, जिससे स्पष्ट हो सके कि SC और ST का प्रमाण पत्र किन परिस्थितियों में पिता से और किन परिस्थितियों में माता से मिले।
