बड़वानी /  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर बालकुआं मंडल का हिंदू सम्मेलन ग्राम बालकुआं में संपन्न हुआ इस सम्मेलन ने सामाजिक समरसता, पर्यावरण चेतना और हिन्दू एकता का सशक्त संदेश दिया। कार्यक्रम में बालकुआं मंडल के अंतर्गत आने वाले लगभग 10 ग्रामों से 20 से अधिक समाजों के हिन्दू समाजजन एक मंच पर उपस्थित हुए, जिससे “हिन्दू समाज—एक पहचान, एक संकल्प” की भावना सुदृढ़ हुई।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए संत राघवेंद्र महाराज (शिवांगी धाम, नर्मदा तट) ने हिन्दू समाज की उत्पत्ति एवं उसकी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज विश्व की सबसे प्राचीन जीवन पद्धति है, जिसने सदैव मानवता, प्रकृति और समरसता के मूल्यों को आगे बढ़ाया है। उन्होंने समाज से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मातृशक्ति जया शर्मा ने पंच परिवर्तन विषय पर प्रभावी उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार को अपने दैनिक जीवन में प्लास्टिक के उपयोग को न्यूनतम करना चाहिए तथा पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाते हुए अपने घर, मोहल्ले और गांव में अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए। उन्होंने स्वच्छता, स्वावलंबन और प्रकृति संरक्षण को सामाजिक दायित्व बताया।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता महादेव यादव ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में हिन्दू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से ऐसे आयोजनों का क्रम चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह हिन्दू सम्मेलन समाज को जाति-पाति के भेद से ऊपर उठाकर हम सभी एक मंच पर विराजित है

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा हम सब हिन्दू हैं, जाति-पाति को विदा करें। हिन्दू-हिन्दू भाई-भाई के संकल्प के साथ आज सम्पूर्ण हिन्दू समाज जागृत हो रहा है।

सम्मेलन में सैकड़ों की संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और वक्ताओं के विचारों को गंभीरता से सुना। कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, अनुशासन और सामाजिक एकता से परिपूर्ण रहा।

हिंदू सम्मेलन कार्यक्रम के समिति संयोजक जगदीश मुकाती, सह-संयोजक दुदालाल चौहान, श्रीमती शांता बाई राठौर, राधेश्याम पाटीदार, सुरेश मुकाती, संतोष यादव, राजू राठौर, डॉ आशीष पाटीदार देवेंद्र राठौर, जगदीश जमादारी, बद्री भाई कोटवाल महेश गेहलोत सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में महिला,युवा और ग्रामीणजनों की सहभागिता रही।

 

 

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