बड़वानी / प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को केंद्र में रखते हुए एक प्रभावी कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों एवं उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन के परिपालन में संपन्न हुआ। मुख्य वक्ता मनीष गुप्ता (अध्यक्ष, चाइल्ड इंडिया ट्रस्ट एवं सदस्य, बाल कल्याण समिति) ने कहा, “हम जितनी बातें मन में दबाकर रखते हैं, उतनी ही कुंठाएँ जन्म लेती हैं। मानसिक समस्याओं का उपचार उन्हें साझा करना है, न कि छुपाना।” उन्होंने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक एवं संवादशील बनने का संदेश दिया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ वीणा सत्य के मार्गदर्शन एवं मानसिक स्वास्थ्य समिति के संयोजक डॉ जितेंद्र ठाकुर के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम की विशेषता लाइव डिजिटल सर्वेक्षण रहा। कार्यशाला के दौरान मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अनेक प्रश्न विद्यार्थियों से पूछे गए, जिनके माध्यम से उनकी समझ, भ्रांतियों एवं जागरूकता स्तर का आकलन किया गया। प्राप्त परिणामों के आधार पर विद्यार्थियों से तथ्यात्मक एवं विश्लेषणात्मक चर्चा की गई। एक प्रश्न — “क्या मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ केवल दवाओं से ही ठीक हो सकती हैं?” — पर 73.58% (39 प्रतिभागी) ने इसे गलत माना, जबकि 26.42% (14 प्रतिभागी) ने सही उत्तर दिया। इस परिणाम के आधार पर मुख्य वक्ता ने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य का उपचार बहुआयामी है, जिसमें संवाद, परामर्श, पारिवारिक सहयोग, जीवनशैली सुधार एवं सकारात्मक सोच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में डॉ कंचन कन्नौजे, प्रो. लक्ष्मण डावर, प्रो. अनीता खांडे सहित प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। संचालन प्रो. अविनाश वानखेड़े, अतिथि परिचय प्रो. अर्चना पीपलाद तथा आभार प्रदर्शन प्रो. रितु कुमरावत द्वारा किया गया। कार्यशाला ने विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं खुलकर संवाद की आवश्यकता को प्रभावी रूप से रेखांकित किया।
