बड़वानी / कलेक्टर श्री शिवराज सिंह वर्मा ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश शासन गृह विभाग के आदेशानुसार जिला दंडाधिकारी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत दिनांक 11 नवम्बर 2020 से 01 जनवरी 2021 तक ‘‘सम्पूर्ण नगर पालिका बड़वानी के क्षेत्रांर्तगत‘‘ ग्रीन श्रेणी के पटाखों के अतिरिक्त अन्य समस्त प्रकार के पटाखो का विक्रय एवं उपयोग पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा एवं उक्त आदेश के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी।
दीपावली पर्व पर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अपील…
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल के सदस्य सचिव श्री एए मिश्रा ने परिपत्र के माध्यम से आमजनो को बताते हुये अनुरोध किया है कि दीपावली प्रकाश का पर्व है, परन्तु दीपावली के समय विभिन्न प्रकार के पटाखों का उपयोग बड़ी मात्रा में किया जाता है। ज्वलनशील एवं ध्वनि कारक पटाखों के उपयोग के कारण परिवेशीय वायु में प्रदूषक तत्वों एवं ध्वनि स्तर में वृद्धि होकर पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कुछ पटाखों से उत्पन्न ध्वनि की तीव्रता 100 डेसीबल से भी अधिक होती है। अतः इस प्रकार के प्रदूषण पर नियंत्रण किया जाना अति आवश्यक है, जिससे मानव अंगों पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है।
श्री मिश्रा ने बताया कि उपरोक्त संबंध में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना जी.एस.आर. 682(ई) दिनांक 05.10.1999 में पटाखों के प्रस्फोटन से होने वाले शोर हेतु मानक के अनुसार प्रस्फोटन के बिन्दु से 4 मीटर की दूरी पर 125 डी.बी. (ए.आई.) या 145 डी.बी. (सी) पीक से अधिक ध्वनि स्तर जनक पटाखों का विनिर्माण, विक्रय व उपयोग वर्जित है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिट-पिटीशन (सिविल) क्रमांक 728/2015 ‘‘ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण’’ के परिप्रेक्ष्य में 23 अक्टूबर, 2018 को दिये गये निर्णयानुसार रात्रि 8.00 बजे से 10.00 बजे तक (02 घन्टे) के पश्चात् दीपावली पर्व पर पटाखों का उपयोग प्रतिबंधित है।
(1) लड़ी (जुड़े हुए पटाखों) गठित करने वाले अलग-अलग पटाखों के निर्माण, विक्रय एवं उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है।
(2) दीपावली पर्व पर एवं अन्य पर्वो/अवसरों पर उन्नत पटाखे एवं ग्रीन पटाखे ही विक्रय किये जा सकेंगें।
(3) दीपावली पर्व पर पटाखों का उपयोग नियत समय रात्रि 8.00 बजे से 10.00 बजे तक तथा निर्धारित स्थल पर ही किया जाना है, साथ ही प्रतिबंधित (ठंददमक) पटाखों का विक्रय न हो। इसके परिपालन हेतु संबंधित क्षेत्र के पुलिस अधिकारी, स्टेशन हाउस आॅफिसर को व्यक्तिगत रूप से दायित्व सौंपे गये है।
पटाखों के जलने से उत्पन्न कागज के टुकड़े एवं अधजली बारूद बच जाती है तथा इस कचरे के सम्पर्क में आने वाले पशुओं एवं बच्चों के दुर्घटनाग्रस्त होने की सम्भावना रहती है। पटाखों के जलाने के उपरान्त उनसे उत्पन्न कचरे को ऐसे स्थानों पर न फेंका जाये, जहाँ पर प्राकृतिक जल स्त्रोतध्पेयजल स्त्रोत प्रदूषित होने की संभावना है, क्योंकि विस्फोटक सामग्री खतरनाक रसायनों से निर्मित होती है।
श्री मिश्रा ने आम जनता से अनुरोध किया है कि वे पटाखों का उपयोग सीमित मात्रा में करें एवं पटाखों को जलाने के पश्चात उत्पन्न कचरे को घरेलू कचरे के साथ न रखे। उन्हे पृथक स्थान पर रखकर नगर-निगम के कर्मचारियों को सौंप देवें। जिससे नगर-निगम एवं नगर पालिका, पटाखों के कचरा को पृथक से संग्रहित करके उसका निष्पादन सुनिश्चित कर सके।
