बड़वानी /ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी के आधार पर आशा का चयन संपूर्ण स्वास्थ्य को घर-घर पहुंचाने के उद्देश्य के साथ किया गया है। एक आशा के रूप में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता की पहुंच घर के रसोई घर तक होती है। अपने इसी संपर्क सूक्ति के दम पर हीआशा स्वास्थ्य की जानकारी के साथ बच्चों के पोषण की स्थिति में भी सुधार लाने में समर्थ होती है। उक्त बातें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एडीजे श्री हेमंत जोशी ने कही।

    छोटे बच्चों की गृह आधारित देखभाल में आशाओं को दक्षता प्रदान करने के लिएआशा ग्राम ट्रस्ट में चल रहे प्रशिक्षण में पहुंचे न्यायाधीश  हेमंत जोशी ने हर घर में विधिक सेवा के मध्यस्थता प्रकल्प को पहुंचा कर विधिक ज्ञान फैलाने तथा परिवारों को संबल प्रदान करने में आशा को महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने परिवार के आपसी विवाद, जमीन विवाद आदि विवादों का मध्यस्थता से निवारण के साथ हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी प्रदान की।

   जिला कम्युनिटी मोबिलाइजर श्री अशोक कनाडे ने प्रेरक कहानी सुना कर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया।

    इस दौरान जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की प्रशासकीय अधिकारी श्रीमती नीता दुबे के द्वारा छोटे बच्चों में जन्मजात विकृति परखने के लिए स्थानीय संसाधन का उपयोग बताकर आरंभिक बाल विकास के तहत  दृष्टि दोष, श्रवण दोष एवं हाथ पैर व सिर की सही गतिविधियों की जानकारी देकर 21 प्रकार की दिव्यांगता परखने हेतु सभी कार्यकर्ताओं को पोस्टर भी प्रदान किए। सभी कार्यकर्ताओं को एडीजे जोशी ने प्रमाण पत्र प्रदान कर उनकी हौसला अफजाई की। इस अवसर पर आशाग्राम ट्रस्ट के कर्मशाला पर्यवेक्षक श्री मणिराम नायडू परियोजना निदेशक मनीष पाटीदार आदि उपस्थित थे।

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