बड़वानी / गणेश चतुर्थी के अवसर पर आर. के. खंडेलवाल हायर सेकंडरी स्कूल, बड़वानी में गणेशजी स्थापना के 34वें वर्ष का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। विद्यालय परिसर में विधि-विधान से भगवान श्री गणेश की स्थापना की गई।
इस अवसर पर विद्यालय में 12 ज्योतिर्लिंग एवं अष्टविनायक की आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई। विद्यार्थियों और आगंतुकों ने प्रदर्शनी के माध्यम से देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों एवं भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को करीब से जाना।
उज्जैन से लाई गई 5 फीट की विशाल अगरबत्ती रही मुख्य आकर्षण
आयोजन में महाकाल की नगरी उज्जैन से विशेष रूप से लाई गई 5 फीट लंबी विशाल अगरबत्ती लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही। सामान्य आकार से कई गुना बड़ी इस अगरबत्ती को देखने के लिए विद्यार्थियों एवं आगंतुकों में खासा उत्साह नजर आया।

गणेश स्थापना स्थल पर रखी गई विशाल अगरबत्ती ने अपने आकार और विशिष्ट स्वरूप के कारण सभी का ध्यान खींचा। उज्जैन से लाई गई इस विशेष अगरबत्ती को गणेशजी के पूजन एवं उत्सव से जोड़ते हुए विद्यालय परिसर में प्रदर्शित किया गया। इसकी उपस्थिति ने आयोजन को एक अलग पहचान दी और यह गणेश उत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही।
उज्जैन की धार्मिक नगरी से बड़वानी तक लाई गई इस 5 फीट की अगरबत्ती को देखने के लिए विद्यार्थियों में विशेष जिज्ञासा रही। विद्यालय में आयोजित गणेश उत्सव में यह विशाल अगरबत्ती न केवल श्रद्धा का प्रतीक बनी, बल्कि अपने अनूठे आकार के कारण लोगों के लिए कौतूहल का विषय भी रही।
गणेशजी की स्थापना के अवसर पर विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सहभागिता की। बालक कुर्ता-पायजामा तथा बालिकाएँ पारंपरिक मराठी परिधान में विद्यालय पहुँचीं। विद्यार्थियों एवं विद्यालय परिवार ने भगवान श्री गणेश की आराधना कर सुख-समृद्धि, ज्ञान एवं मंगल की कामना की।
विद्यालय में पिछले 34 वर्षों से गणेश उत्सव की परंपरा निरंतर चली आ रही है। विद्यालय के प्राचार्य माधव खंडेलवाल ने कहा कि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभारंभ के प्रतीक हैं। गणेश उत्सव की यह 34 वर्षों पुरानी परंपरा विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, संस्कारों एवं धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से गूंज उठा। विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक आयोजन में सहभागिता की।
गणपति बप्पा मोरया! मंगलमूर्ति मोरया!
