इंदौर / शहर में काेरोना का संक्रमण बढ़ने के साथ ही निजी अस्पतालों की लूट भी बढ़ गई है। आइसीयू, आक्सीजन, पीपीई किट, ग्लब्ज, मास्क और सैनिटाइजर के नाम पर मरीजों से मनमानी फीस वसूल की जा रही है। डॉक्टरों की फीस भी बढ़ गई है। अस्पतालों में एक-एक मरीज को देखने के लिए एक ही दिन में 2500 रुपये लिए जा रहे हैं। यही नहीं अन्य बीमारियों के मरीजों का इलाज करने से पहले भी कोरोना जांचने के लिए ही तीन-तीन अलग टेस्ट किए जा रहे हैं। इससे मरीजों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।

सामान्य मरीज में कोविड-19 वायरस की जांच के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट के अलावा रैपिड एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है। इसके बाद चेस्ट का सीटी स्कैन भी किया जा रहा है। शहर के अन्नपूर्णा क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में शनिवार को भर्ती मरीज का रविवार तक 1.25 लाख रुपये का बिल बना दिया गया। साथ ही दवाइयों का बिल 40 हजार रुपये का थमा दिया। पीपीई किट के हर दिन के 1500 रुपये, ऑक्सीजन का शुल्क 2500 रुपये प्रतिदिन, मास्क, ग्लब्ज और सैनिटाइजर के लिए भी 750 रुपये हर दिन का खर्च जोड़ा जा रहा है। इतने भारी-भरकम खर्च को झेलना मरीज के वश से बाहर होता जा रहा है। डॉक्टरों की फीस के अलावा नर्सिंग स्टाफ का भी दो दिन का खर्च आठ हजार रुपये तक लिया जा रहा है। ऐसे मामलों की शिकायत प्रशासन के पास भी पहुंच रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी भी मरीजों को कोई राहत नहीं दिलवा पा रहे हैं। कोविड के लिए जिन शासकीय डॉक्टरों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है, वे भी निजी अस्पतालों की पैरवी करते नजर आते हैं। वे उनके बिल को खुद ही सही ठहराते हुए उनका पक्ष ले रहे होते हैं।

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