बड़वानी/मंगलवार की देर शाम 25 और लोगो की रिपोर्ट पाॅजिटिव प्राप्त हुई है। इन्हें मिलाकर मार्च 2021 में ही संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 430 हो गया,जबकि फरवरी में केवल 88 लोागो की रिपोर्ट ही पाॅजिटिव आई थी। यनिकि फरवरी में मिले संक्रमितों की तुलना में मार्च माह में लगभग 5 गुना वृद्धि देखी गई है। इस समय जिले में चैकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे है जिले के वरला,बलवाड़ी में तो जागरुकता के चलते लाकडाउन लगा ही दिया, पानसेमल में भी आज एक बैठक करके शुक्रवार,शनिवार और रविवार को सार्वजनिक लाकडाउन की निर्णय लिया गया। बताया जाता है कि पानसेमल, बरला, बलवाड़ी और खेतिया महाराष्ट्र के समीप होने से अधिक प्रभावित है। चर्चा तो यह है कि जो आंकड़े पाॅजिटिव मरीजो के इन क्षैत्रों के सामने आ रहे है…प्रीाावित उससे कही अधिक ही है जो निजी जाॅच करवा कर अपने हिसाब से निजी अस्पतालों में उपचार करवा रहे है।

खुली पाती जिला प्रशासन के नाम——

बड़वानी जिले में कोरोना वायरस संक्रमण के आंकड़े भयावह नजर आ रहे है जो कि प्रत्यक्ष रूप से सामने नही है और जिम्मेदार भी छुपाने से गुरेज नही कर रहे है। महाराष्ट्र से सटे जिले के वरला,सेंधवा,खेतिया,पानसेमल, निवाली ही नही जिला मुख्यालय पर भी स्थिति खराब है वही लोग भी छिपते छिपाते इलाज कराने में लगे है।  जिस तरह पिछले वर्ष कोरोना को लेकर जनजागृति व सरकारी तथा निजी अस्पतालों के अधिग्रहण व संसाधनों को लेकर जो तैयारी थी इस बार बड़ी लापरवाही देखी जा रही है। आम नागरिकों के लिए धारा 144 और तमाम नियम कायदे लेकिन राजनीतिक दलों के लिए छूट? समझ से परे या यूं कहें कि कोरोना भी राजनीतिक दलों के आगे बेबस है यह बात प्रशासनिक अधिकारियों को पता है । मुहं पर मास्क ऒर दो गज की दूरी जिले में छुटभैये नेताओ के दलबदल के आगे बौनी नजर आ रही है(कुछ नेता तो कोरोना संक्रमित होकर चोरी छिपे इलाज भी करा चुके है फिर भी मान नही रहे )। प्रदेश के मुखिया से लेकर पूर्व गृहमंत्री दलबदलूओ को ऐसे गले लगा रहे कि पूछो मत ,मास्क और दो गज की दूरी केवल जुबानी खर्च साबित हो रही है। सही मायने में प्रशासन ईमानदारी से जिले में होने वाले राजनीतिक दलो के हर कार्यक्रम पर नियम शर्ते थोपे और सख्ती से लगाम लगाए जिस तरह आम नागरिक के लिए लगाए जा रहे है तो थोड़ा बहुत फर्क पड़े….. वैसे भी प्रशासन के दोनों महमहिमो के आगे सब बौने है यह जिले के लोग अच्छे से समझ गए है फिर कहा इच्छाशक्ति का अभाव है समझ से परे है, लेकिन प्रशासन केवल कागजी शेर बना बैठा है। गोया की मास्क के नाम पर राजस्व इकट्ठा करने की खुली दादागिरी कलेक्टर व एसपी द्वारा अधिकारियों को दे दी गई है ,क्या इससे कुछ फर्क पड़ा फैलते संक्रमण को लेकर….जवाब नही में ही होगा तो बडा सवाल यह है कि कोरोना के संक्रमण को कैसे रोके फैलने से…….जिला प्रशासन के सामने एक और चुनोती है कि गेंहू की पैदावार का वाजिब दाम किसानों को दिलाना और त्योहारी सीजन पर व्यवसाय को सम्हालना क्योकि बिते साल तो कोरोना से जैसे तैसे लोग उबर गए लेकिन महामारी के रिटर्न होने से बाजार दिवालिया हो जाएगा और लोगो की आर्थिक स्थिति आगे बद्तर हो जायेगी।वैसे भी बाजार में लगातार लॉक डाउन की अफवाहों का बीच कोरोना से ज्यादा लोगो को रोजगार व खाने पीने की व्यवस्था की चिंता फिलहाल ज्यादा है ।

इधर निजी अस्पतालों में 5 हजार रुपए प्रतिदिन केवल कमरे का किराया (दवाई गोली अलग से) इस तरह आठ से दस दिन में करीब लाख रुपए का भार संक्रमित अथवा लक्षण वाले मरीज से ऐंठे जा रहे है। जिला प्रशासन को चाहिए कि निजी अस्पतालों पर लगाम लगते हुए फीस के मापदण्ड तय किए जाए जिससे कोरोना के नाम पर चल रही लूटखसोट पर लगाम लगाई जाए। सरकारी अस्पतालों के तथाकथित डॉक्टर भी इसमे शामिल जो अस्पताल में कम और निजी की अस्पताल की तरफदारी में ज्यादा लगे है। सभी निजी अस्पतालों के कैमरे चेक कर ले तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। कौन चिकित्सक कितना समय कहा दे रहा है।  महाराष्ट्र से महामारी अब जिले के सीमावर्ती देहातो को लगातार जकड़ती जा रही है और संक्रमित इधर उधर चोरी छिपे इलाज करा रहे है तो कुछ काल के गाल में समाहित हो रहे है लेकिन प्रशासन के पास आधिकारिक आंकड़े अब भी नही है । एक जानकारी के अनुसार कोरोना की आड़ में मौसमी बीमारी व वायरल फीवर जैसे कि वर्तमान में चिकनगुनिया की तरह ही सैकड़ो लोग हाथ पांव ,जोड़ में दर्द,सीने में दर्दे ,सिर दर्द,मामूली जुकाम से पीड़ित है लेकिन कोरोना के नाम पर निजी अस्पतालों की लूटखसोट व पॉजिटिव होने के भय से जयदा परेशान है और मौसमी बीमारी की आड़ में कोरोना का दंश अलग से झेल रहे है।

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