बड़वानी(रेवा की पुकार) एक समय था जब बड़वानी जिला मुख्यालय को ही सुन्दर सड़को तथा मनमोहक हरियाली के कारण ‘‘क्लीन बड़वानी-ग्रीन बड़वानी’’ कहा जाता था। 25 मई 1998 के दिन बड़वानी को जिले का गौरव प्राप्त हुआ। जिलेवासियों को बहुत उम्मीदें थी कि अब उन्हें मूलभूत सुविधाऐं मिलेगी, लेकिन आज भी जिलावासी सुविधाओं की बाट जो रहा है। रेल लाईन के सुहाने सपने दिखाये जाते रहे लेकिन अभी तक मामला ठंडे बस्ते में लटका पड़ा है और उपर से मासूम बच्चे जो इंदिरा गार्डन में रेल में बैठने की इच्छा पूर्ति कर लेते थे वह भी सालों से भंगार की शोभा बड़ा रही है। ऐसा नही है कि जिले ने नेतृत्व नही दिये 3-3 महत्वपूर्ण पदो को सुशोभित किया है जिले ने लेकिन फिर भी ना तो जिले को मेडिकल कालेज मिला और ना ही इंजिनिरिंग कालेज की सुविधा। शहरवासियों ने धोबड़िया तालाब पर अथक श्रमदान करके पर्यटन स्थल का रुप दिया था, धीरे-धीरे वह भी गुमनाम सा होता गया। हाॅ आशाग्राम में जरुर शिवकुंज के रुप में एक सौगात मिली जिसका आनन्द शहरवासी आज भी ले रहे है। जिला बनने से प्रशासनिक सुविधाऐं जरुर नागरिकांे को प्राप्त हुई है पहले कलेक्टोरेट सहित कई विभाग खरगोन में होने से इस जिले के लोगो को खरगोन जाना-आना पड़ता था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी व सिविल सर्जन कार्यालय पहले से ही बड़वानी में स्थित रहें है। फिर भी यह कहना गलत नही होगा कि मूलभूत सुविधाओं जैसे बिजली,पानी व सड़को की सुविधाओं से आज भी झूझते नजर आ रहे है ग्रामीण अंचल के रहवासी। बड़वानी जिला मुख्यालय पर ही सड़को का नजारा देख लीजिऐ एक्का-दुक्का ही सड़क ठीक-ठाक होगी बाकि तो उबड़-खाबड़ गड्डो से भरी नजर आ जाऐगी। खैर जो भी हो जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी समझना चाहिए ? बड़वानी जिले की स्थापना के आज 26 वर्ष पूर्ण होने पर सभी जिलेवासियो को हार्दिक शुभकामनाऐं…बधाई !!
