बड़वानी/वैसे भी यह सर्वविदित है कि इस आदिवासी बाहुल्य जिले से ग्रामीण क्षैत्र से कई लोग रोजगार की तलाश में पलायन के लिए मजबूर होते है। वर्तमान में तो बड़वानी जिला मुख्यालय के व्यापार-व्यवसाय की भी हालत पतली नजर आ रही है। उसके पिछेे का कारण स्पष्ट है कि इस वर्ष बारिश अधिक होने से फसलें चैपट हो गई हैं वही सरदार सरोवर डेम के कारण नर्मदा पट्टी का काफी हिस्सा डुबा हुआ है। पुराना पूल डूब जाने से धार जिले के बड़वानी से लगे कई गाॅवो का सम्पर्क जिला मुख्यालय से टूट चुका है। क्योकि इन ग्रामों के रहवासियों को घूमकर बड़वानी आने से कुक्षी,मनावर नजदीक पड़ता है। खरगोन जिला मुख्यालय पर व्यापार-व्यवसाय इसलिए प्रगतिशील है कि करीब 112 ग्रामों के लोग शहर आते है। क्योंकि नजदीक में कोई बड़ा ग्राम नहीं पड़ता है। जबकि बड़वानी जिला मुख्यालय से 16 किमी पर अजंड, 21 किमी पर सिलावद और 24 किमी पर पाटी जैसे अच्छे ग्राम स्थित है इनसे लगे ग्रामवासियों को उक्त स्थानों पर ही सर्वसुविधा उपलब्ध हो जाती है। ऐसे में जिला मुख्यालय का व्यापार-व्यवसाय प्रभावित होना स्वभाविक है। ऐसा माना जाता है कि बढ़ती बेरोजगारी तथा व्यापार-व्यवसाय को देखते हुए बड़वानी जिला मुख्यालय या उसके आसपास किसी बड़े उधोग की स्थापना बहुत जरुरी है। बड़वानी जिला मुख्यालय के हाॅस्पिटल को 500 विस्तर का दर्जा दिया जाना चाहिए, क्योंकि बड़वानी जिला मुख्यालय पर 4 जिलों के मरीज अपना उपचार कराने के लिए आते है। मेडिकल कालेज और इंजिनियरिंग कालेज की कमी भी काफी खल रही है शहरवासियों को। उक्त सुविधाऐं उपलब्ध करवाने के लिए जिले के जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों ने अपने स्तर से गंभीर प्रयास करना चाहिए। ताकि जनमानस को बेहतर चिकित्सा सेवाऐं और रोजगार उपलब्ध हो सके। कहा जाता है कि जिला मुख्यालय पर राजनेतिक प्रतिनिधित्व भी उतना दमदार नही है जितना होना चाहिए शयद यही कारण है कि सत्ता हो या संगठन अधिकाॅंशताः तहसीलोें के जनप्रतिनिधि ही अपना कब्जा जमाने में आगे निकलजाते है।
