बड़वानी / शहर की श्रीजी कुंज कॉलोनी में जलसंकट से रहवासी परेशान हैं। कॉलोनी में रहने वाले करीब 50 से 60 परिवार पिछले पांच महीनों से पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं। रहवासियों का कहना है कि पहले तीसरे दिन नल से पानी मिलता था, लेकिन अब चार से पांच दिन के अंतराल में भी पानी नहीं मिल रहा है। नल आने पर भी महज 10 मिनट पानी चलता है, जिससे परिवारों की जरूरत पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में लोगों को निजी टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है, जिसके लिए 300 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
कॉलोनी निवासी कविता तिवारी ने बताया कि पानी की समस्या के कारण रहवासी काफी परेशान हैं। हर 8 से 15 दिन में टैंकर बुलाना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। कॉलोनी में न तो हैंडपंप है और न ही कुएं की सुविधा, ऐसे में पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना मजबूरी बन गया है। उन्होंने बताया कि नल से पानी की आपूर्ति करने वाले कर्मचारियों और नगर पालिका के जिम्मेदारों से संपर्क करने पर कई बार फोन नहीं उठाए जाते। फोन उठाने पर भी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल दी जाती है। रहवासियों ने नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
मोटर और पुरानी मशीनों के कारण आ रही समस्या: निक्कू चौहान
नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि निक्कू चौहान ने बताया कि वाटरमैन से चर्चा में उन्होंने पानी की आपूर्ति पूरी करने की बात कही है, जबकि कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि वहां पानी नहीं पहुंच रहा है। इस मामले को संज्ञान में लेकर मौके पर जांच कराई जाएगी, ताकि पता चल सके कि पानी की आपूर्ति में बाधा कहां आ रही है। उन्होंने कहा कि नगर पालिका सभी रहवासियों से जुड़ी है और जहां भी इस तरह की समस्या सामने आएगी, वहां पहुंचकर समाधान का प्रयास किया जाएगा।
चौहान ने बताया कि शहर में पानी की व्यवस्था सुधारने के लिए दो नई पानी की टंकियों का निर्माण कराया जा रहा है। दिसंबर में पानी की मोटरें बदलने की योजना है। उन्होंने कहा कि इंटेकवेल की एक मोटर खराब होने से भी जलापूर्ति प्रभावित हो रही है। नगर में कई पंप करीब 20 साल पुराने हैं, जिनके कारण भी समस्याएं सामने आ रही हैं। इन पंपों को बदलने के बाद जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद है।
अब देखना होगा कि नगर पालिका की जांच और प्रस्तावित सुधारों के बाद श्रीजी कुंज कॉलोनी के रहवासियों को नियमित पानी मिल पाता है या नहीं। फिलहाल रहवासी टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर हैं।
