बड़वानी / खरगोन-बड़वानी लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री गजेंद्र सिंह पटेल ने लोकसभा के शून्यकाल के दौरान मध्यप्रदेश के शिक्षकों से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय को प्रभावी ढंग से उठाया। उन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष रखी।
सांसद श्री पटेल ने सदन को अवगत कराया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में म. प्र राज्य में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य किया गया है। जबकि बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पूर्व नियमानुसार की गई थी, उस समय TET का कोई प्रावधान नहीं था।
उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों की नियुक्ति तत्कालीन NCTE के नियमों के अंतर्गत पूरी तरह वैध रूप से हुई थी और वे वर्षों से निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान में TET को अनिवार्य किए जाने से उन्हें व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी परिस्थितियों में TET की अनिवार्यता से राहत प्रदान करना न्यायसंगत और आवश्यक है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ पुनर्विचार कर शिक्षकों के हित में उचित निर्णय लिया जाए, ताकि उनके अनुभव, सेवा और समर्पण का सम्मान बना रहे।
उल्लेखनीय है कि इस विषय को विभिन्न जनप्रतिनिधियों का समर्थन प्राप्त हो रहा है तथा शिक्षक संगठनों द्वारा भी आवेदन प्रस्तुत कर इस मांग को प्रमुखता से उठाया गया है।
