बड़वानी / विगत दिनों से बावनगजा सिद्ध क्षेत्र पर विराजित अंकलिकर परंपरा के चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका सुप्रज्ञ मति जी माताजी ससंघ का आज प्रातः बावनगजा सिद्ध क्षेत्र की वंदना के उपरांत सिद्ध नगरी बड़वानी के लिए हुआ आज प्रातः 8.30 बजे बावनगजा रोड से दिगंबर जैन समाज जन ने आर्यिका संघ की मंगल आगवानी की माताजी संघ को श्रीफल भेंट कर,पाद प्रक्षालन कर बैंड बाजो के साथ मंगल प्रवेश करवाया पद बिहार में बड़वानी के युवा बड़ी संख्या साथ रहे माताजी के आगमन पर रंगोली से घरो के सामने सजावट की गई ,आर्यिका संघ ने मंदिर में प्रवेश कर सभी बेदी के विराजित भगवान के दर्शन किए ,समाज जन ने भगवान के अभिषेक और माताजी के मुखारविन्द से शांतिधारा सम्पन्न हुई। उसके पश्चात धर्म सभा के पूर्व आचार्य श्री सुनील सागर जी के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन समाज के महिला ,पुरुष,युवाओं ने किया साथ ही महिला मंडल ने आर्यिका संघ को शास्त्र भेंट किया संपूर्ण समाज ने आचार्य श्री का पूजन संपन्न कर आर्यिका सुप्रज्ञ मति जी माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा आप बहुत भाग्यशाली हो कि आपके नगर में तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी का चातुर्मास हुआ और आपको उनकी विशेष कृपा और आशीर्वाद मिला और अभी पुनः उनके पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी के आशीर्वाद से हमारा मंगल वर्षायोग चातुर्मास यहां होगा चातुर्मास में आप सभी अपना100% देना और चातुर्मास का पूरा पूरा लाभ लेना, प्रातः युवाओं की क्लास ,अभिषेक और प्रवचन होंगे फिर दोपहर में हमारा सामयिक स्वाध्याय और महिलाओं की दुपहर और शाम को क्लास होगी चातुर्मास करवा रहे हो तो उसका पूरा लाभ उठाना ,जो आयेगा वो पाएगा ,जो सोयेगा वो खायेगा क्योंकि पुण्यवान जीव ही गुरु की आगवानी और संगति का लाभ उठा सकते है जिनके पुण्य कमजोर था वो सोते रह गए और आगवानी का अवसर अपने हाथ से गंवा दिया ,आप देखना ये चातुर्मास ऐतिहासिक चातुर्मास हो जाएगा ,मेहनत और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ,आप जीवन में कभी भी खड़े खड़े किसी चीज का इंतजार मत कीजिए आप आगे बढ़ते जाइए आपसे लोग दुनिया जुड़ते जाएंगे और एक कारवा बनते जाएगा ,लोग कामयाबी मिलने के बाद ही जुड़ते है,माताजी ने चींटी का उदाहरण दिया कि कैसे उसके मुंह में चावल का दाना रख कर वो दीवार चढ़ती है कितनी ही बार गिरती है फिसलती है पर वो अपने वजन से ज्यादा बड़ा चावल का दाना मुंह में दबाए अंततः दीवार पर चढ़ ही जाती है अतः आप भी कभी हिम्मत मत हारना ।जो गुरु की सेवा ,आगवानी करता है और देव,शास्त्र गुरु के शरणागत होता है उसके जीवन में कभी संकटों का सामना नहीं करना पड़ता है। जिनका पुण्य कम होता है वो जिनवाणी का रसपान नहीं कर पाते ,चातुर्मास में जिनवाणी की गंगा बरसने वाली है ।आप समन्वय का भाव लेकर आओगे तो बहुत पुण्य अर्जित कर ज्ञान पाओगे आपकी प्यास बुझ जाएगी,पुण्यशाली जीव ही जिनवाणी सुनने का सौभाग्य पाता है,यदि एक भव में हमें जिनवाणी का बीज रोपित हो जाए तो हमारे आगामी किसी भव में जिनवाणी का ये बीज वट वृक्ष बन कर हमारे मोक्ष की राह को आसान करेगा और भव भव का भटकना समाप्त हो जाएगा।,आप चातुर्मास करवा रहे है तो उसका पूरा पूरा लाभ उठाएं आप यदि देव ,शास्त्र,गुरु से भागोगे तो कहा जाओगे ,इसके अलावा शांति कहा पर है ,बाहर का आनंद कुछ पल का है ,देव,शास्त्र ,गुरु का आनंद कई जन्मों का है ।जिनको गुरु संत और मंदिर घर से दूर लगे तो समझ लेना उनके लिए मोक्ष भी दूर ही है नगर में साधु आए तो उनके कर पात्र में एक ग्रास जरूर देना भले एक अंजुली जल देना ,अपने घर से कुछ ले जाकर देना, दिगंबर साधु 32 दोषों और 16 अन्तराय को टाल कर आहार लेते है, आहार देने में मन की शुद्धि , विवेक और विनय होना चाहिए एवं वात्सल्य पूर्वक आहार करवाना चाहिए साथ ही गुरुओं और आगम में कभी भेद मत करना इनमें भेद करने वाले 84 लाख योनियों में भटकते रहते है।
इस अवसर पर समाज के युवा,महिला,पुरुष आदि उपस्थित थे।
उपरोक्त जानकारी मनीष जैन द्वारा प्राप्त हुई।
