बड़वानी /  ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी जैन अनुयायियों द्वारा श्रुत पंचमी के रूप में मनाई जाती है उसी कड़ी में आज दिंगबर जैन समाज बड़वानी द्वारा दिगंबर जैन मंदिर में परम पूज्य आचार्य श्री आदि सागर जी अंकलीकर की परम्परा के वर्तमान आचार्य सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिका सुप्रज्ञ मति जी माता जी के ससंघ सानिध्य में प्रातः भगवान के पाण्डुक शिला पर अभिषेक और शांति धारा सम्पन्न हुई ,प्रथम अभिषेक और शांति धारा करने का सौभाग्य सौरभ कुमार महेंद्र कुमार पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ , तत् पश्चात नित्य नियम की पूजन ,भगवान नेमिनाथ विधान और आचार्य श्री आदि सागर जी का पूजन संपन्न हुई, उसके पूर्व समाज जन ने आचार्य आदि सागर जी के चित्र अनावरण और दीप प्रज्वलन समाज के वरिष्ठ जन ने किया ,साथ ही पूज्य माता जी ससंघ को समाज के महिला,पुरुष युवा लोगों ने शास्त्र भेंट किया ,माता जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए श्रुत पंचमी के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि आचार्य धरसेन जो कि गिरनार क्षेत्र पर विराजमान थे को ये लगा कि मेरी उम्र अब हो चली है और शरीर कमजोर हो रहा है और मुझे जो शास्त्रों का ज्ञान है वो मेरे साथ ही चला जाएगा अतः उन्होंने एक अन्य आचार्य  अर्हद बलि  मुनिराज को संदेश भेजा तब उन्होंने अपने दो योग्य शिष्य आचार्य पुष्पदंत और आचार्य भूत बलि को गिरनार भेजा जहां आचार्य धरसेन ने उन शिष्यों की परीक्षा ले कर उनको परखा और पाया कि ये योग्य शिष्य है तब उन्होंने सारे शास्त्रों का ज्ञान उन्हें दे दिया और आज ही के दिन दोनों मुनिराजों ने गुजरात के अंकलेश्वर नगर में ताड़ पत्र पर प्रथम जिन शास्त्र शटखण्डागम को लिपि बद्ध किया क्योंकि उसके बाद शास्त्रों को याद रखने की शक्ति खत्म होते जा रही थी  और वह शुभ दिन श्रुत पंचमी के रूप में मनाया जाता है और शास्त्र , द्वादशांग जिनवाणी की पूजन की जाती है इन्हीं शास्त्र की वजह से हमे और हमारे साधु संतों को धर्म रूपी ज्ञान की प्राप्ति होती है, साथ ही आचार्य श्री आदि सागर जी के आचार्य पदारोहण दिवस भी है पर आदि सागर जी महाराज के जीवन पर आधारित संस्मरण सुनाये ,धर्म सभा के पश्चात द्वादशांग जिनवाणी की पालकी में शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्ग पर आर्यिका संघ के सानिध्य में निकाली गई जिसमें पालकी को उठाने का सौभाग्य महिलाओं को प्राप्त किया ,शोभा यात्रा की समाप्ति के पश्चात प्रथम शास्त्र विराजमान करने का सौभाग्य गौरव,दीपचंद जी पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ,द्वितीय शास्त्र विराजमान करने का सौभाग्य जितेंद्र कुमार देवेंद्र कुमार गोधा परिवार को प्राप्त हुआ और तृतीय शास्त्र विराजमान करने का सौभाग्य वृति मंजुला जैन,आदिश  जैन परिवार को प्राप्त हुआ, सभा का संचालन मनीष जैन द्वारा किया गया।इस अवसर पर समाज के महिला,पुरुष,युवा,बच्चे आदि उपस्थित रहे और बड़े उत्साह पूर्वक पर्व मनाया गया,बाहर से आए अतिथियों का अंग वस्त्र,माला तिलक लगा कर बहुमान किया गया ।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *