बड़वानी /भारत देश अपनी महान संस्कृति और संस्कारों के लिए विश्व भर में जाना पहचाना जाता है। चाहे बुजुर्गों का सम्मान हो या पर्यावरण सुरक्षा हो या फिर बच्चों को संस्कार देने की बात हो हमें यह सब विरासत में मिला है। वर्तमान में तेजी से बदल रहे वैश्विक परिदृश्य से भारत भी अछूता नहीं रहा है। यही कारण है कि अब भारत जैसे वसुधैव कुटुंबकम का अनुसरण करने वाले देश में भी वृद्ध आश्रम और अनाथालयों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। उक्त बातें दंत रोग विशेषज्ञ एवं आशाग्राम ट्रस्ट के सचिव डॉ चक्रेश पहाड़िया ने अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दुर्व्यवहार रोकथाम जागरूकता दिवस के अवसर पर आयोजित गोष्ठी में कही। उन्होंने कहा वर्तमान में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार होना एक सामाजिक चुनौती के रूप में हमारे सामने है फलस्वरुप वरिष्ठ जन शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। आशाग्राम ट्रस्ट में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग जन सशक्तिकरण विभाग के समन्वय से आयोजित वरिष्ठ जन संगोष्ठी में एक और बुजुर्गों को व्यवस्थित दिनचर्या के साथ-साथ खान-पान का व्यवस्थित ध्यान रखकर केवल स्वयं के लिए ही जीवन जीने के लिए प्रेरित किया तथा बिना मांगे किसी को भी सलाह नहीं देने की प्रवृत्ति को आत्मसात करने पर बल दिया गया। इस दौरान बुजुर्गों ने अपनी व्यवस्थित दिनचर्या से सभी को रूबरू कराया। 70 वर्षीय श्रीमन्ना महाराज ने बताया मैं आज भी साइकिल से बाजार जाता हूं और अपना कार्य स्वयं करने की कोशिश करता हूं जोखिम से बचता हूं। डॉ सोलंकी ने बताया ट्रस्ट में सीनियर सिटीजन के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए हम नियमित गतिविधियां आयोजित करते हैं तथा बहुत जल्द इसे विस्तारित करेंगे। इस अवसर पर आशा ग्राम ट्रस्ट के कर्मचारी अधिकारी एवं स्वयंसेवक उपस्थित थे।
