बड़वानी / शासन-प्रशासन की मंशानुरूप कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत बड़वानी विकासखंड के ग्राम तलून में ‘रात्रि चौपाल’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती जयती सिंह ने स्थानीय किसानों से सीधा संवाद कर उन्हें कृषि को लाभ का जरिया बनाने के लिए आधुनिक पद्धतियों को अपनाने की समझाइश दी। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषक आधुनिक पद्धतियों को अपनायें एवं बिना घबराए नए प्रयोग करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक हम नई विधियों और पद्धतियों को नहीं अपनाएंगे तब तक कृषि को मुनाफे का जरिया नहीं बनाया जा सकता, इसलिए किसान स्वयं आधुनिक खेती के मार्गदर्शक बनें।
चौपाल के दौरान कलेक्टर ने कपास की फसल की उत्पादकता बढ़ाने हेतु विशेष रूप से एचडीपीएस( हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम) पद्धति अपनाने पर जोर दिया। इस पद्धति के अंतर्गत परंपरागत खेती की तुलना में कतार से कतार और पौध से पौध की दूरी कम रखी जाती है। प्रशासन द्वारा जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक एकड़ भूमि पर इस पद्धति को प्रदर्शित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
एचडीपीएस पद्धति की सफलता के लिए अधिक उत्पादन देने वाली विशेष उन्नत किस्मों के बीजों के चयन आवश्यक है। इसके तहत ATCH 605, सुरक्षा, शक्ति, PKV 081 और CNA 1054 जैसी कपास की किस्मों की जानकारी दी गई। इन किस्मों के पौधों की ऊँचाई और फैलाव कम होता है, लेकिन इनमें गूलर (बॉल्स) की संख्या अधिक होती है, जो घनी खेती के लिए बेहद उपयुक्त हैं।
बाजार में बेहतर दाम हासिल करने के लिए किसानों को छोटे रेशे वाले कपास के स्थान पर अधिक बाजार मूल्य वाले मध्यम एवं लंबे रेशे वाले कपास की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे किसानों की आय में सीधा इजाफा हो सके।
खेती को रसायनों से मुक्त करने और भूमि की उपजाऊ क्षमता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ के तहत प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया गया। साथ ही जैविक खेती हेतु बीज प्रमाणीकरण व जिले में बनाए जा रहे क्लस्टरों के सम्बंध में जानकारी दी गई। चौपाल में कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को हर तीन साल में मृदा परीक्षण केंद्र से अपनी मिट्टी का नमूना परीक्षण कराने, गोबर की खाद का प्रयोग करने की सलाह दी गई।
इस दौरान संयुक्त कलेक्टर, उप संचालक कृषि विभाग, उप संचालक उद्यानिकी विभाग, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
