बड़वानी /हमारा जिला आकांक्षी जिला होने के कारण यहां पर दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की निर्भरता पूरी तरह से शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं पर निर्भर है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों-मैदानी अमले को अपने पदीन दायित्वों का निर्वहन पूरी सजगता एवं सामाजिक संवेदनाओं के साथ करने की आवश्यकता है। जिससे हम गरीबों को समय पर बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा सके। इस कार्य में जो अधिकारी-कर्मचारी जानबूझकर लापरवाही करेगा उसे दण्डित किया जायेगा।

      कलेक्टर श्री शिवराजसिंह वर्मा को मंगलवार को आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति बैठक की अध्यक्षता करते हुए उक्त बाते कही। इस बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री ऋतुराजसिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. अनिता सिंगारे, सिविल सर्जन डाॅ. आरसी चोयल सहित जिला स्वास्थ्य अधिकारी, विभिन्न कार्यक्रमों के नोडल अधिकारी, खण्ड चिकित्सा अधिकारी उपस्थित थे।

रिपोर्टिंग में लापरवाही पर दो पदाधिकारियों को मिला शोकाज नोटिस

      समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर ने एचएमआईएस, आरसीएच पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया एवं समय पर इन्ट्री नही होने पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी एवं नोडल अधिकारी शहरी डाॅ. सुरेखा जमरे तथा खण्ड विस्तार प्रशिक्षक श्रीमती दुर्गा सोनी को शोकाज नोटिस जारी कर, जहां जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिये है। वही समस्त खण्ड चिकित्सा अधिकारियों को एक सप्ताह में इन्ट्री पूर्ण कराने की चेतावनी दी गई है। इसके पश्चात् भी कार्य में गुणात्मक सुधार न होने पर और कठोर कार्यवाही की जायेगी।

इन योजनाओं की हुई समीक्षा, दिये निर्देश

      बैठक के दौरान कलेक्टर ने टीकाकरण, पोषण पुर्नवास केन्द्र, शिशु गहन चिकित्सा इकाई, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, मलेरिया कार्यक्रम, कुष्ठ निवारण कार्यक्रम, क्षय नियंत्रण कार्यक्रम, परिवार कल्याण कार्यक्रम, हेल्थ एण्ड वेलनेस कार्यक्रम, कायाकल्प कार्यक्रम की समीक्षा की। साथ ही कलेक्टर ने समस्त खण्ड चिकित्सकों को निर्देशित किया कि वे सुनिश्चित करेंगे कि उनके क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं का पंजीयन गर्भ धारण के प्रथम तिमाही में ही होकर उनकी समस्त जांच प्रक्रिया प्रारंभ हो जाये। जिससे हाई रिस्क महिलाओं का चिन्हांकन कर, उन्हे समय रहते विशेष उपचार एवं सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

      बैठक के दौरान कलेक्टर ने निर्देशित किया कि जिले में शत प्रतिशत संस्थागत प्रसव कराकर ही हम मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम कर सकते है। अतः हमारा प्रयास होना चाहिए कि समस्त प्रसव संस्थागत ही हो।

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